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Aatish Indori
meri haalat ke zimmedaar tum nikle
meri haalat ke zimmedaar tum nikle | मेरी हालत के ज़िम्मेदार तुम निकले
- Aatish Indori
मेरी
हालत
के
ज़िम्मेदार
तुम
निकले
कहानी
के
कहानीकार
तुम
निकले
कोई
और
तो
हरा
पाता
नहीं
मुझको
रक़ीबों
के
सिपह-सालार
तुम
निकले
मेरे
चहरे
पे
रौनक़
लौट
आई
है
मुहब्बत
से
करिश्मा-कार
तुम
निकले
तेरे
जाने
से
सब
कुछ
मिट
गया
जानाँ
मेरे
घर
के
दर-ओ-दीवार
तुम
निकले
- Aatish Indori
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दीवार
है
दुनिया
इसे
राहों
से
हटा
दे
हर
रस्म-ए-मोहब्बत
को
मिटाने
के
लिए
आ
Hasrat Jaipuri
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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नई
नस्लें
समझ
पाएँ
मुहब्बत
के
मआनी
हमें
इस
वास्ते
भी
शा'इरी
करनी
पड़ेगी
Dipendra Singh 'Raaz'
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मैं
क़िस्सा
मुख़्तसर
कर
के,
ज़रा
नीची
नज़र
कर
के
ये
कहता
हूँ
अभी
तुम
से,
मोहब्बत
हो
गई
तुम
से
Zubair Ali Tabish
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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भुला
पाना
बहुत
मुश्किल
है
सब
कुछ
याद
रहता
है
मोहब्बत
करने
वाला
इस
लिए
बर्बाद
रहता
है
Munawwar Rana
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ज़रूरत
सब
कराती
है
मोहब्बत
भी
इबादत
भी
नहीं
तो
कौन
बेमतलब
किसी
को
याद
करता
है
Umesh Maurya
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वो
जो
पहला
था
अपना
इश्क़
वही
आख़िरी
वारदात
थी
दिल
की
Pooja Bhatia
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जब
चाहें
सो
जाते
थे
हम,
तुम
सेे
बातें
करके
तब
उल्टी
गिनती
गिनने
से
भी
नींद
नहीं
आती
है
अब
इश्क़
मुहब्बत
पर
ग़ालिब
के
शे'र
सुनाए
उसको
जब
पहले
थोड़ा
शरमाई
वो
फिर
बोली
इसका
मतलब?
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Tanoj Dadhich
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चाँद
का
ख़्वाब
सजा
के
बैठे
हैं
घर
में
साँकल
लगा
के
बैठे
हैं
संग
को
ख़ुदा
बना
के
बैठे
हैं
धूप
में
दिया
जला
के
बैठे
हैं
मुक़ाबला
गेंदे
के
फूल
से
है
गुलाब
ख़ुद
को
सजा
के
बैठे
हैं
गहरी
काली
रात
बितानी
है
हम
तो
हिया
जला
के
बैठे
हैं
दिल
को
याद
उसकी
मत
दिलवाओ
मुश्किल
से
चुप
करा
के
बैठे
हैं
फ़ोन
कहाँ
आता
है
तुम्हारा
अब
ख़ुद
को
ख़ुद
ही
मना
के
बैठे
हैं
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Aatish Indori
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यूँँ
नहीं
था
कि
सवालात
से
मुँह
मोड़
लिया
ज़िंदगी
ने
मेरी
हर
बात
से
मुँह
मोड़
लिया
जो
ज़रूरी
है
वो
सब
कुछ
तो
मिला
है
मुझको
इसलिए
मैंने
शिकायात
से
मुँह
मोड़
लिया
ख़ूब
प्यासे
भी
थे
और
ख़ूब
सदाएँ
भी
दीं
देर
से
बरसा
तो
बरसात
से
मुँह
मोड़
लिया
रूठ
तो
दिल
भी
गया
जब
से
मोहब्बत
रूठी
इस
ने
हर
तरह
के
जज़्बात
से
मुँह
मोड़
लिया
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Aatish Indori
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राहियों
को
आब-ओ-दाना
दीजिए
हर
सफ़र
में
अपना
हिस्सा
दीजिए
दौड़
अंधी
है
तो
फिर
क्यूँँ
दौड़ना
हर
किसी
को
आप
रस्ता
दीजिए
आपको
आसान
करना
हैं
सफ़र
पंछियों
को
आब-ओ-दाना
दीजिए
खेलते
उस
ओर
से
शकुनी
हैं
जब
आप
कन्हैया
को
पासा
दीजिए
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Aatish Indori
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मौज
जाएगी
हया-दार
नज़र
आने
से
मैं
तो
बोतल
से
पि
यूँँगा
न
कि
पैमाने
से
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Aatish Indori
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रूम
पर
आप
हैं
और
सब्र
हमारा
देखो
बंद
खिड़की
नहीं
की
और
न
ही
पर्दा
खींचा
Aatish Indori
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