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Aatish Indori
koshishein kar lo main baadal nahin hone vaala
koshishein kar lo main baadal nahin hone vaala | कोशिशें कर लो मैं बादल नहीं होने वाला
- Aatish Indori
कोशिशें
कर
लो
मैं
बादल
नहीं
होने
वाला
बरसूँ
बे-वज्ह
यूँँ
पागल
नहीं
होने
वाला
शर्त
ये
है
कि
हमारे
ही
तरह
हो
जाओ
यार
सोना
हूँ
मैं
पीतल
नहीं
होने
वाला
ख़्वाब
टूटा
तो
नया
ख़्वाब
दिखाते
क्यूँँ
हो
ख़्वाब
ये
भी
तो
मुकम्मल
नहीं
होने
वाला
चाहिए
पेड़
उगाने
के
अलावा
भी
कुछ
बाग़
पेड़ों
से
तो
जंगल
नहीं
होने
वाला
- Aatish Indori
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हाए
क्या
दौर-ए-ज़िंदगी
गुज़रा
वाक़िए
हो
गए
कहानी
से
Gulzar Dehlvi
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आदतन
उसके
लिए
फूल
ख़रीदे
वरना
नहीं
मालूम
वो
इस
बार
यहाँ
है
कि
नहीं
Abbas Tabish
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रहबर
भी
ये
हमदम
भी
ये
ग़म-ख़्वार
हमारे
उस्ताद
ये
क़ौमों
के
हैं
में'मार
हमारे
Unknown
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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वो
चाहे
मजनूँ
हो,
फ़रहाद
हो
कि
राँझा
हो
हर
एक
शख़्स
मेरा
हम
सबक़
निकलता
है
Munawwar Rana
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दूर
तक
छाए
थे
बादल
और
कहीं
साया
न
था
इस
तरह
बरसात
का
मौसम
कभी
आया
न
था
Qateel Shifai
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तुम्हारी
राह
में
मिट्टी
के
घर
नहीं
आते
इसलिए
तो
तुम्हें
हम
नज़र
नहीं
आते
Waseem Barelvi
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दिल
से
साबित
करो
कि
ज़िंदा
हो
साँस
लेना
कोई
सुबूत
नहीं
Fahmi Badayuni
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माँ-बाबा
का
सोच
के
हर
दम
रुक
जाता
हूँ
वरना
तो
इतने
ग़म
में
मैंने
पंखे
से
टंग
कर
मर
जाना
था
Shashwat Singh Darpan
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हर
गीत
में
हर
बार
गाऊँगा
तुझे
अपनी
ग़ज़ल
में
गुनगुनाऊँगा
तुझे
तू
ईद
है
और
तू
ही
दीवाली
मेरी
मैं
हर
बरस
यूँँही
मनाऊँगा
तुझे
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Krishnakant Kabk
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जताते
कैसे
है
यह
रीत
आनी
चाहिए
थी
मुहब्बत
हो
गई
थी
तो
बतानी
चाहिए
थी
ज़रूरी
जब
था
तो
तलवार
उठानी
चाहिए
थी
मुहब्बत
तो
मुहब्बत
है
निभानी
चाहिए
थी
यहाँ
से
लौटने
का
कोई
रस्ता
ही
नहीं
है
तुम्हें
पहले
से
मजबूरी
बतानी
चाहिए
थी
तुम्हारी
तरह
जिसको
बे-वफ़ाई
करना
आता
मुहब्बत
में
तुम्हें
लड़की
सियानी
चाहिए
थी
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Aatish Indori
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मेरी
आँखों
का
जाला
छट
रहा
है
दिखेगा
सच
कि
कुहरा
छट
रहा
है
हुए
मनभेद
थोड़े
कम
तो
देखो
वतन
पर
आया
ख़तरा
छट
रहा
है
दिए
में
लौ
नहीं
है
शेष
फिर
भी
दिलों
पर
से
अँधेरा
छट
रहा
है
शफ़क़
दिखने
में
इक
मुद्दत
लगेगी
बहुत
धीरे
कुहासा
छट
रहा
है
दिलों
पे
खिंच
रही
है
फिर
से
सरहद
हमारा
फिर
से
शजरा
छट
रहा
है
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महज़
'आशिक़
है
दीवाने
नहीं
हैं
वे
जो
मय-ख़ाने
में
बैठे
हैं
जो
दीवाने
हैं
वे
माशूक़
की
बाँहों
में
वीराने
में
बैठे
हैं
Aatish Indori
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हमारे
हौसलों
को
पाँव
देते
हैं
पिता
धूप
ओढ़ते
हैं
छाँव
देते
हैं
तुम्हारे
शहर
में
ये
मसअला
होगा
हमारे
गाँव
में
सब
छाँव
देते
हैं
ये
दुनिया
तो
बना
देती
है
घनचक्कर
जिनालय
और
शिवालय
ठाँव
देते
हैं
इसी
लालच
से
आँगन
में
जगह
दे
दो
बड़े
बूढ़े
घनेरी
छाँव
देते
हैं
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Aatish Indori
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जंगलों
को
हमने
दफ़ना
कर
बनाएँ
हैं
हमने
भाई
मरघटों
में
घर
बनाएँ
हैं
हमने
दिल
तक
जाने
वाली
धमनियाँ
रोकी
हमने
नदियाँ
पाट
कर
के
घर
बनाएँ
हैं
जंगलों
में
रहने
वालों
पर
भी
लगते
हैं
हम
ने
अंग्रेज़ों
से
बदतर
कर
बनाएँ
हैं
धूप
बारिश
और
हवा
घुसने
नहीं
देते
हमने
भाई
जेल
जैसे
घर
बनाएँ
हैं
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