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Aatish Indori
ik se badh ke ek vaade aur bhi to hain
ik se badh ke ek vaade aur bhi to hain | इक से बढ़ के एक वादे और भी तो हैं
- Aatish Indori
इक
से
बढ़
के
एक
वादे
और
भी
तो
हैं
कैसे
बच
पाएँगे
झाँसे
और
भी
तो
हैं
माँ
दवा
दारू
तेरी
कैसे
कराऊँ
कहती
है
बीवी
कि
बेटे
और
भी
तो
हैं
चाहने
की
वजह
यह
बिल्कुल
नहीं
है
इस
जहाँ
में
चाँद-चेहरे
और
भी
तो
हैं
तोहमतें
इक
दूजे
पे
हम
क्यूँँ
लगाएँ
दूर
जाने
के
बहाने
और
भी
तो
हैं
बंद
मत
करिए
पिलाते
रहिए
मुझको
पास
मेरे
राज़
गहरे
और
भी
तो
हैं
टूटे
पैरों
से
भी
नपते
हैं
हिमालय
हौसला
मत
तोड़
रस्ते
और
भी
तो
हैं
- Aatish Indori
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डर
अपने
बता
दूँ
तो
तुम
पक्का
डर
जाओगे
मैं
फिर
भी
हूँ
ज़िंदा
मगर
तुम
तो
मर
जाओगे
Aatish Indori
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करी
जो
बात
तो
रिश्ता
निकल
आया
सर-ए-राह
अजनबी
अपना
निकल
आया
दुआएँ
दिल
से
माँगी
तो
असर
देखो
समुंदर
से
मेरा
दरिया
निकल
आया
बची
थी
दूरी
जब
दो-चार
क़दमों
की
हमारे
बीच
में
सहरा
निकल
आया
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कब
मैं
यारों
शराब
पीता
हूँ
मैं
तो
जन्नत
का
आब
पीता
हूँ
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इश्क़
वो
जिस
में
ग़म
नहीं
होंगे
उस
कहानी
में
हम
नहीं
होंगे
अस्ल
दौलत
तो
छूट
जायेगी
गर
मुहब्बत
में
ग़म
नहीं
होंगे
खोपड़ी
ख़र्च
मत
करो
साहब
पेड़
से
उल्लू
कम
नहीं
होंगे
कैसे
हम
होंगे
क़ैस
और
लैला
इश्क़
में
गर
सितम
नहीं
होंगे
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एक
मुद्दत
था
वफ़ादार
बहुत
अच्छा
है
दूसरों
से
तो
तेरा
यार
बहुत
अच्छा
है
शोर
यह
कर
रहे
हैं
अब
कि
कहाँ
फँस
गए
हो
पहले
कहते
थे
कि
घरबार
बहुत
अच्छा
है
पास
लाने
के
लिए
हाथ
ज़रा
खींचा
तो
फूल
गुच्छे
से
पलटवार
बहुत
अच्छा
है
बात
ऐसी
है
कि
हम
ठहरे
दिहाड़ी
वाले
दूसरों
के
लिए
इतवार
बहुत
अच्छा
है
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