bhor hone ko hai har raat ko yuñ samjha hai | भोर होने को है हर रात को यूँँ समझा है

  - Aatish Indori
भोरहोनेकोहैहररातकोयूँँसमझाहै
मुश्किलोंसेभरेहालातकोयूँँसमझाहै
शांतइसतरहहीहोतीहैपहाड़ीनद्दी
हरउबलतेहुयेजज़्बातकोयूँँसमझाहै
मेराकिरदारकहानीमेंअभीहैज़िंदा
बादमुद्दतकीमुलाक़ातकोयूँँसमझाहै
इम्तिहानोंकेलिएज्ञानमिलाहैआतिश
ज़िन्दगीमेंमिलीहरमातकोयूँँसमझाहै
  - Aatish Indori
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