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Aatish Alok
jo ruka hua tha ruka raha jo ruka nahin use rokna
jo ruka hua tha ruka raha jo ruka nahin use rokna | जो रुका हुआ था रुका रहा जो रुका नहीं उसे रोकना
- Aatish Alok
जो
रुका
हुआ
था
रुका
रहा
जो
रुका
नहीं
उसे
रोकना
ये
अजब
रिवाज़
है
इश्क़
का
जो
रुका
नहीं
उसे
रोकना
मैं
कभी
कभी
हूँ
ये
सोचता
कि
हवा
को
हाथ
से
रोक
लूँ
मैं
कभी
कभी
हूँ
ये
चाहता
जो
रुका
नहीं
उसे
रोकना
न
मुझे
सुकून
न
नींद
ही
न
मिलेगा
चैन
ही
एक
दिन
ये
बहुत
दिनों
मुझे
खाएगा
जो
रुका
नहीं
उसे
रोकना
- Aatish Alok
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उतरी
हुई
नदी
को
समुंदर
कहेगा
कौन
सत्तर
अगर
हैं
आप
बहत्तर
कहेगा
कौन
पपलू
से
उनकी
बीवी
ने
कल
रात
कह
दिया
मैं
देखती
हूँ
आपको
शौहर
कहेगा
कौन
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Paplu Lucknawi
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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जहाँ
सारे
हवा
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
वहाँ
भी
हम
दिया
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
Abbas Qamar
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रखते
हैं
मोबाइल
में
मोहब्बत
की
निशानी
अब
फूल
किताबों
में
छुपाया
नहीं
करते
Meharban Amrohvi
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ये
हवा
सारे
चराग़ों
को
उड़ा
ले
जाएगी
रात
ढलने
तक
यहाँ
सब
कुछ
धुआँ
हो
जाएगा
Naseer Turabi
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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नए
दौर
के
नए
ख़्वाब
हैं
नए
मौसमों
के
गुलाब
हैं
ये
मोहब्बतों
के
चराग़
हैं
इन्हें
नफ़रतों
की
हवा
न
दे
Bashir Badr
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बहरस
ख़ारिज
हूँ
ये
मालूम
है
पर
तुम्हारी
ही
ग़ज़ल
का
शे'र
हूँ
Gyan Prakash Akul
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ये
जो
है
फूल
हथेली
पे
इसे
फूल
न
जान
मेरा
दिल
जिस्म
से
बाहर
भी
तो
हो
सकता
है
Abbas Tabish
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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कहने
को
तो
दुनिया
तेरी
बहुत
बड़ी
सी
है
मौला
मेरे
ग़म
के
आगे
लेकिन
कितनी
छोटी
है
मौला
तू
भी
तो
हरदम
केवल
उसकी
ही
सुनता
रहता
है
दुनिया
भी
तेरी
बिल्कुल
ही
तेरे
जैसी
है
मौला
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Aatish Alok
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एक
परिंदा
मर
गया
ये
शाप
देकर
नेटवर्कों
में
फँसोगे
तुम
भी
एक
दिन
Aatish Alok
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एक
दिन
तुम
देखना
मैं
जीभ
काटूँगा
इन्ही
के
बीच
में
ही
काट
देते
हैं
तुम्हारी
बात
को
जो
Aatish Alok
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नए
इस
साल
से
है
उम्मीदें
यही
हर
साल
कहता
हूँ
वैसे
Aatish Alok
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इक
शौक़
भी
कमाल
है
इक
ख़्वाब
भी
अज़ीज़
दोनों
के
ज़द
में
आदमी
बे-मौत
ही
मरे
Aatish Alok
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