kyuuñ taammul hai tujhe roz-e-ajal aane men | क्यूँ तअम्मुल है तुझे रोज़-ए-अजल आने में

  - Aaftab Rais Panipati
क्यूँतअम्मुलहैतुझेरोज़-ए-अजलआनेमें
ज़ीस्तकालुत्फ़मिलेगामुझेमरजानेमें
सुनोक़िस्सा-ए-आलामतड़पजाओगे
दर्दऔरसोज़भराहैमिरेअफ़्सानेमें
क़ल्ब-ए-मुज़्तरकोबनारखाहैघरहिरमाँने
औरक्याचीज़हैइसदिलकेसियह-ख़ानेमें
अबछलकनेकोहैसाक़ीमिरेजीवनकागिलास
भरगयाआब-ए-फ़नाउम्रकेपैमानेमें
ख़िर्मन-ए-सब्र-ओ-सुकूँख़ाकहोक्यूँजलकर
बिजलियाँकौंदरहीहैंमिरेकाशानेमें
पर्दा-ए-जहलउठादीजिएआँखोंसेज़रा
जल्वा-ए-हक़नज़रआएगासनम-ख़ानेमें
'आफ़्ताब'किमुसीबतकेहैंआसारअयाँ
जोश-ए-वहशतहैफ़ुज़ूँऔरभीदीवानेमें
  - Aaftab Rais Panipati
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy