उम्र लगती है तो लहजा-ए-ग़ज़ल बनता है

  - Aadil Rasheed
उम्रलगतीहैतोलहजा-ए-ग़ज़लबनताहै
एकदोदिनमेंकहींताजमहलबनताहै
हमपेलाज़िमहैकिहमवक़्तकोज़ाया'करें
आजकीक़द्रकरेंगेतोहीकलबनताहै
तपनापड़ताहैमुक़द्दरकोबनानेकेलिए
खारापानीतभीबरसातकाजलबनताहै
उसनेइल्ज़ामलगायातोयेहक़हैमेरा
यारअहसानकाइतनातोबदलबनताहै
  - Aadil Rasheed
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