jo ban-sanwar ke vo ik maah-roo nikalta hai | जो बन-सँवर के वो इक माह-रू निकलता है

  - Aadil Rasheed
जोबन-सँवरकेवोइकमाह-रूनिकलताहै
तोहरज़बानसेबसअल्लाह-हूनिकलताहै
हलालरिज़्क़कामतलबकिसानसेपूछो
पसीनाबनकेबदनसेलहूनिकलताहै
ज़मीनऔरमुक़द्दरकीएकहैफ़ितरत
किजोभीबोयावहीहू-ब-हूनिकलताहै
येचाँदरातहीदीदारकावसीलाहै
ब-रोज़-ए-ईदहीवोख़ूब-रूनिकलताहै
तिरेबग़ैरगुलिस्ताँकोक्याहुआ'आदिल'
जोगुलनिकलताहैबे-रंग-ओ-बूनिकलताहै
  - Aadil Rasheed
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy