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Shubham Rai 'shubh'
thaam lo jo haath to sambhal saktaa hoon
thaam lo jo haath to sambhal saktaa hoon | थाम लो जो हाथ तो सँभल सकता हूॅं
- Shubham Rai 'shubh'
थाम
लो
जो
हाथ
तो
सँभल
सकता
हूॅं
साथ
तेरे
मीलों
तक
चल
सकता
हूॅं
ता'रीफ़ें
जो
करे
तो
इठलाना
मत
वरना
मैं
भी
बात
बदल
सकता
हूॅं
- Shubham Rai 'shubh'
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वक़्त-बे-वक़्त
उसको
बुलाया
नहीं
शख़्स
जो
साथ
मेरा
निभाया
नहीं
साथ
उसके
बिना
हम
चले
थे
मगर
रास्ते
ने
भी
मुझको
गिराया
नहीं
जिस
ज़माने
से
डरते
रहे
उम्र
भर
उस
ज़माने
ने
अपना
बनाया
नहीं
वो
भी
इल्ज़ाम
मुझपे
लगाते
रहे
इक
घड़ी
साथ
जिसने
बिताया
नहीं
तीर
इतने
सहे
तंज़
के
दोस्तों
वक़्त
आया
तो
हमने
चलाया
नहीं
हार
मिलती
अगर,सब
सुनाते
मुझे
जीत
पर
कोई
मुझको
सराहा
नहीं
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छुप
के
दीदार
बहुत
करता
है
मुझको
बेज़ार
बहुत
करता
है
प्यार
वो
रात-गए
करता
है
दिन
में
तकरार
बहुत
करता
है
काम
करता
है
सभी
मेरा
पर
पहले
इनकार
बहुत
करता
है
मेरे
झुमके
के
लिए
वो
घर
को
ख़ास-बाज़ार
बहुत
करता
है
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कि
दर्द-ए-सुख़न
गुनगुनाते
हुए
ज़रा
ठहरा
तुझको
सुनाते
हुए
सभी
पीर
समझे
मिरा
इसलिए
तुझे
गाया
है
बुदबुदाते
हुए
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करोगे
याद
तो
बीते
ज़माने
याद
आएँगे
कि
आएगा
नहीं
वो
बस
फ़साने
याद
आएँगे
बचेगा
जब
नहीं
रहबर
न
कोई
राह
निकलेगा
फँसे
नय्या
को
फिर
साहिल
पुराने
याद
आएँगे
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बिछड़ने
का
ग़म
तुमको
क्यूँँ
है
रहो
ख़ुश
कि
आज़ाद
हो
तुम
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