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Shubham Rai 'shubh'
tere baad chaahengi aañkhen usii ko
tere baad chaahengi aañkhen usii ko | तेरे बाद चाहेंगी आँखें उसी को
- Shubham Rai 'shubh'
तेरे
बाद
चाहेंगी
आँखें
उसी
को
खुली
आँख
से
जो
न
सपने
दिखाए
- Shubham Rai 'shubh'
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सुना
है
लोग
उसे
आँख
भर
के
देखते
हैं
सो
उस
के
शहर
में
कुछ
दिन
ठहर
के
देखते
हैं
Ahmad Faraz
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मेरे
दर्द
की
वो
दवा
है
मगर
मेरा
उस
सेे
कोई
भी
रिश्ता
नहीं
मुसलसल
मिलाता
है
मुझ
सेे
नज़र
मैं
कैसे
कहूँ
वो
फ़रिश्ता
नहीं
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S M Afzal Imam
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हम
भी
तुमको
धोखा
दें
ये
ठीक
नहीं
आँख
के
बदले
आँख
कहाँ
तक
जायज़
है
Gaurav Singh
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सुब्ह-ए-मग़रूर
को
वो
शाम
भी
कर
देता
है
शोहरतें
छीन
के
गुमनाम
भी
कर
देता
है
वक़्त
से
आँख
मिलाने
की
हिमाकत
न
करो
वक़्त
इंसान
को
नीलाम
भी
कर
देता
है
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Nadeem Farrukh
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आईने
आँख
में
चुभते
थे
बिस्तर
से
बदन
कतराता
था
एक
याद
बसर
करती
थी
मुझे
मैं
साँस
नहीं
ले
पाता
था
Tehzeeb Hafi
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ले
दे
के
अपने
पास
फ़क़त
इक
नज़र
तो
है
क्यूँँ
देखें
ज़िंदगी
को
किसी
की
नज़र
से
हम
Sahir Ludhianvi
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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मेरी
नींदें
उड़ा
रक्खी
है
तुम
ने
ये
कैसे
ख़्वाब
दिखलाती
हो
जानाँ
किसी
दिन
देखना
मर
जाऊँगा
मैं
मेरी
क़स
में
बहुत
खाती
हो
जानाँ
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Subhan Asad
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लग
गई
मुझको
नज़र
बेशक़
तुम्हारी
आईनों
मैं
बहुत
ख़ुश
था
किसी
इक
सिलसिले
से
उन
दिनों
Aarush Sarkaar
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जब
मिली
आँख
होश
खो
बैठे
कितने
हाज़िर
जवाब
हैं
हम
लोग
Jigar Moradabadi
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जैसे
क़िस्मत
आज़माना
होता
है
उस
तरह
अब
दिल
लगाना
होता
है
ये
खुले
गेसू
नशीली
आँखें
बस
और
क्या
दिल
हार
जाना
होता
है
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Shubham Rai 'shubh'
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निगह
में
मुझे
जिसके
आना
नहीं
था
जहाँ
आना
था
ये
ज़माना
नहीं
था
बिताता
रहा
ज़िंदगी
जिस
तरह
से
मुझे
इस
तरह
से
बिताना
नहीं
था
सता
जो
रही
है
मोहब्बत
मुझे
अब
कि
कल
कह
रही
दिल
लगाना
नहीं
था
ख़ता
इतनी
बस
कर
गया
दिल-लगी
में
तुम्हीं
दिल-नशीं
हो
जताना
नहीं
था
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Shubham Rai 'shubh'
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सब
हो
ये
वक़्त-ए-रुख़्सत
न
हो
हो
मुलाक़ात
आफ़त
न
हो
तुम
तसव्वुर
में
आती
रहो
दिल
लगे
तुम
सेे
नफ़रत
न
हो
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Shubham Rai 'shubh'
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अपने
पे
जो
आऊँगा
किसी
दिन
फिर
तुमको
भुलाऊँगा
किसी
दिन
पागल
जो
समझ
रही
ये
दुनिया
पागल
ही
बनाऊँगा
किसी
दिन
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Shubham Rai 'shubh'
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अभी
जंग
जारी
है
हारा
नहीं
हूँ
कि
हथियार
अपना
उतारा
नहीं
हूँ
ज़मीं
है
ये
मेरी
न
ललकारो
मुझ
को
सुनामी
हूँ
मैं
कोई
धारा
नहीं
हूँ
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Shubham Rai 'shubh'
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