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Shubham Rai 'shubh'
ashk ka ye bahaav kaisa
ashk ka ye bahaav kaisa | अश्क का ये बहाव कैसा
- Shubham Rai 'shubh'
अश्क
का
ये
बहाव
कैसा
राख
है,
तो
अलाव
कैसा
है
सुना
की
सुशील
है
वो
तो
अभी
ये
सुभाव
कैसा
है
अडिग
वो
ज़ुबान
का
तो
बात
से
अब
घुमाव
कैसा
दोस्त
तो
हैं
सभी
बराबर
आज
फिर
से
चुनाव
कैसा
ज़िंदगी
में
सभी
मिला
है
यार
तो
अब
अभाव
कैसा
- Shubham Rai 'shubh'
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बुरे
हालात
है
पर
यार
अब
भी
गले
मिलता
है,
सेहत
पूछता
है
Gagan Bajad 'Aafat'
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तिलिस्म-ए-यार
ये
पहलू
निकाल
लेता
है
कि
पत्थरों
से
भी
ख़ुशबू
निकाल
लेता
है
है
बे-लिहाज़
कुछ
ऐसा
की
आँख
लगते
ही
वो
सर
के
नीचे
से
बाजू
निकाल
लेता
है
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Tehzeeb Hafi
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बातें
दवा
का
काम
कर
सकतीं
हैं
यार
बीमार
से
तुम
बात
करके
देखना
Shubhangi kalii
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तन्हाई
ये
तंज
करे
है
तन्हा
क्यूँ
है
यार
कहाँ
है
आगे
पीछे
चलने
वाले
Vishal Singh Tabish
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ये
आरज़ू
भी
बड़ी
चीज़
है
मगर
हमदम
विसाल-ए-यार
फ़क़त
आरज़ू
की
बात
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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किस
तरह
मेरी
जान
ये
किरदार
बने
है
जो
तुझ
सेे
मिले
है
वो
तेरा
यार
बने
है
Vikram Gaur Vairagi
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इश्क़
के
रंग
में
ऐ
मेरे
यार
रंग
आया
फिर
आज
रंगों
का
तेहवार
रंग
हो
गुलाबी
या
हो
लाल
पीला
हरा
आ
लगा
दूँ
तुझे
भी
मैं
दो
चार
रंग
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Afzal Ali Afzal
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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उसके
झुमके
की
बात
क्या
कीजे
उसकी
बातें
भी
यार
गहना
हैं
Gaurav Singh
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कहाँ
की
दोस्ती
किन
दोस्तों
की
बात
करते
हो
मियाँ
दुश्मन
नहीं
मिलता
कोई
अब
तो
ठिकाने
का
Waseem Barelvi
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दोस्ती
से
दुश्मनी
तक
यानी
ख़ूबी
से
कमी
तक
भाव
अच्छा
चाहता
है
जानवर
से
आदमी
तक
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Shubham Rai 'shubh'
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ख़ुदा
का
घर
अगर
कोई
नहीं
है
दिखा
मुझको
कि
डर
कोई
नहीं
है
उड़ी
दरगाह
की
चादर
हवा
में
बता
मौला
का
दर
कोई
नहीं
है
सभी
भगवान
जब
इंसान
में
हैं
तो
क्या
आदर्श
नर
कोई
नहीं
है
सिखाते
हैं
ग़ज़ल
कहना
वो
हमको
अभी
जिनको
हुनर
कोई
नहीं
है
धरा
पर
मोक्ष
है
अपना
बनारस
बनारस
सा
नगर
कोई
नहीं
है
बहुत
सारे
मकाँ
परदेस
में
हैं
मगर
घर
सा
शजर
कोई
नहीं
है
नवाज़िश
आपकी
है
सामने
हूँ
इधर
इल्म-ओ-हुनर
कोई
नहीं
है
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Shubham Rai 'shubh'
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ई
डी
का
शोर
है
चुपचाप
रहो
सत्ता
पुर-ज़ोर
है
चुपचाप
रहो
भागकर
मुझ
सेे
तू
जाएगा
कहाँ
रेड
हर
ओर
है
चुपचाप
रहो
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Shubham Rai 'shubh'
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रुत्बा
नहीं
रहता
बिछड़
कर
आशियाने
से,
दीपक
कहाँ
रौशन
हुआ,
अरमाँ
जलाने
से
Shubham Rai 'shubh'
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हवाओं
से
मोहब्बत
करने
वाले
हम
चराग़ों
से
वफ़ादारी
नहीं
करते
ग़लत
होगे
अगर
तो
खुल
के
बोलेंगे
किसी
की
हम
तरफ़-दारी
नहीं
करते
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Shubham Rai 'shubh'
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