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Rahul
mujhe nahin maaloom
mujhe nahin maaloom | "मुझे नहीं मालूम"
- Rahul
"मुझे
नहीं
मालूम"
मुझे
नहीं
मालूम
क्या
आबाद
करेगा
ये
शौक़-ए-सुख़न
मुझे
बर्बाद
करेगा
मेरा
साया
तो
स्याह
तमस
है
मेरा
परतव
आख़िर
किसे
रौशन
करेगा
ज़िंदा
मख़्सूस
नहीं
किसी
के
लिए
जाने
के
बाद
कौन
याद
करेगा
सही
कहा
था
लिखना
छोड़
दो
माना
लोग
पढ़ेंगे
समझा
कौन
करेगा
- Rahul
खटखटाने
की
कोई
ज़हमत
ही
आख़िर
क्यूँ
करे
इसलिए
भी
घर
का
दरवाज़ा
खुला
रखता
हूँ
मैं
Tousief Tabish
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हुस्न
बला
का
क़ातिल
हो
पर
आख़िर
को
बेचारा
है
इश्क़
तो
वो
क़ातिल
जिसने
अपनों
को
भी
मारा
है
ये
धोखे
देता
आया
है
दिल
को
भी
दुनिया
को
भी
इसके
छल
ने
खार
किया
है
सहरा
में
लैला
को
भी
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Jaun Elia
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तमाम
जिस्म
को
आँखें
बना
के
राह
तको
तमाम
खेल
मुहब्बत
में
इंतिज़ार
का
है
Munawwar Rana
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नहीं
है
लब
पे
दिखावे
का
भी
तबस्सुम
अब
हमें
किसी
ने
मुक़म्मल
उदास
कर
दिया
है
Amaan Haider
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कीजे
इज़हार-ए-मोहब्बत
चाहे
जो
अंजाम
हो
ज़िंदगी
में
ज़िंदगी
जैसा
कोई
तो
काम
हो
Priyamvada ilhan
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दिल
के
तमाम
ज़ख़्म
तेरी
हाँ
से
भर
गए
जितने
कठिन
थे
रास्ते
वो
सब
गुज़र
गए
Kumar Vishwas
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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सुलग
रहे
थे
शजर
दिल
तमाम
भँवरों
के
दिल
अपना
वार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
बहुत
मलाल
हुआ
देखकर
गुलिस्ताँ
में
तमाचा
मार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
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Shajar Abbas
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यूँँ
दिल
को
तड़पने
का
कुछ
तो
है
सबब
आख़िर
या
दर्द
ने
करवट
ली
या
तुम
ने
इधर
देखा
Jigar Moradabadi
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अब
मिरा
ध्यान
कहीं
और
चला
जाता
है
अब
कोई
फ़िल्म
मुकम्मल
नहीं
देखी
जाती
Jawwad Sheikh
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तुम
सेे
बातें
करता
हूँ
जब
लगता
है
तब
ज़िंदा
हूँ
मैं
Rahul
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बंद
कमरे
में
अकेले
रोना
जिस्म
धरती
पे
बिछा
के
सोना
जब
कभी
याद
मिरी
आ
जाए
मेरे
कूचे
में
न
लम्हें
खोना
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Rahul
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तेरी
नफ़ासत
से
गुज़ारिश
है
मिरी
ऐसी
ही
तू
रहना
ये
ख़्वाहिश
है
मिरी
Rahul
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था
किसी
का
न
सहारा
मुझको
फिर
किया
किसने
इशारा
मुझको
नाम
तक
भूल
गया
अपना
जब
नाम
से
उसने
पुकारा
मुझको
ढलते
दिन
भी
कभी
अच्छे
थे
जब
नाव
कहती
थी
किनारा
मुझको
अब
नहीं
लगता
मुझे
जानेगी
जब
वो
देखेगी
दोबारा
मुझको
मौत
आए
तो
तरस
खाए
ख़ुद
ऐसी
हालत
से
गुज़ारा
मुझको
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Rahul
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आ
जो
गया
हूँ
तुम्हारी
गली
में
आके
मुझे
तुम
गले
से
लगा
लो
Rahul
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