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Prince
kaho kis shakhs ke gham men kare yah haal baithe ho
kaho kis shakhs ke gham men kare yah haal baithe ho | कहो किस शख़्स के ग़म में करे यह हाल बैठे हो
- Prince
कहो
किस
शख़्स
के
ग़म
में
करे
यह
हाल
बैठे
हो
वजह
क्या
है
भला
इतने
बड़े
ग़म
पाल
बैठे
हो
सभी
वादे
वफ़ा
के
तोड़
कर
आख़िर
भला
क्यूँँ
तुम
ये
उसके
लौट
आने
का
भरम
क्यूँँ
पाल
बैठे
हो
मिलाते
क्यूँँ
नहीं
हो
प्रिंस
ख़ुदस
आँख
आख़िर
तुम
कहो
आख़िर
कि
क्यूँँ
ख़ुद
ही
से
वहशत
पाल
बैठे
हो
- Prince
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कभी
हँसता
हूँ
तो
आँखें
कभी
मैं
नम
भी
रखता
हूँ
हर
इक
मुस्कान
के
पीछे
हज़ारों
ग़म
भी
रखता
हूँ
शिफ़ा
भी
दे
नहीं
सकता
मुझे
कोई
मेरा
अपना
नतीजन
मैं
मिरे
ज़ख़्मों
का
ख़ुद
मरहम
भी
रखता
हूँ
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Shubham Dwivedi
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ये
ग़म
हमको
पत्थर
कर
देगा
इक
दिन
कोई
आ
कर
हमें
रुलाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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दिल
ना-उमीद
तो
नहीं
नाकाम
ही
तो
है
लंबी
है
ग़म
की
शाम
मगर
शाम
ही
तो
है
Faiz Ahmad Faiz
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तू
अपने
सारे
दुख
जाकर
बताता
है
जिन्हें,
इक
दिन
बढ़ाएँगे
वही
ग़म-ख़्वार
तेरी
आँख
का
पानी
Siddharth Saaz
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मुझे
छोड़
दे
मेरे
हाल
पर
तिरा
क्या
भरोसा
है
चारा-गर
ये
तिरी
नवाज़िश-ए-मुख़्तसर
मेरा
दर्द
और
बढ़ा
न
दे
Shakeel Badayuni
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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खुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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एक
दूजे
को
देख
के
बाहम
संग
पिघला
हुआ
था
मोम
के
साथ
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कि
अब
तेरे
बिना
भी
देख
सोना
आ
गया
मुझको
हँसी
रखकर
लबों
पर
देख
रोना
आ
गया
मुझको
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हम
सेे
पूछ
तू
दुनियादारी
किस
को
कहते
हैं
हमने
इस
ख़राबे
में
एक
उम्र
काटी
है
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देखने
निकले
थे
उस
बे-वफ़ा
को
आख़री
बार
और
वो
आख़री
था
बस
जिसे
हमने
देखा
Prince
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ख़ुदा
कुछ
हाल
कर
बेज़ार
ऐसे
अब
कि
मर
जाऊँ
अगर
जीता
रहा
तो
रोज़
मेरी
जान
जाएगी
Prince
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