muddat kisi ki chaanv men bachpan guzaar kar | मुद्दत किसी की छाँव में बचपन गुज़ार कर

  - Mohammad Aquib Khan
मुद्दतकिसीकीछाँवमेंबचपनगुज़ारकर
अबजारहेहैंपेड़सेझूलाउतारकर
जंगीरिवायतोंकोयूँँतारतारकर
गरहौसलाहैतुझ
मेंतोसीनेपेवारकर
इकशहरजिस
मेंहमअदूसेजीतकरबसे
वोशहरछोड़नापड़ाअपनोंसेहारकर
येवोवबाहैजिस
मेंकयामतकीहैझलक
कुछफायदानहींहैकिसीकोपुकारकर
मौजआजमानतेहैंतुमकोनाख़ुदा
चाहेडुबादेमुझकोयादरियाकेपारकर
नफरतकीबारिशोंमेंसियासतकीराहपर
आदमतूअपनेबर्गगुलोंकोनाखारकर
स्याहीनहींमैंअपनेलहूसेलिखूँग़ज़ल
इकबारमेरेसामनेतूज़िक्रयारकर
  - Mohammad Aquib Khan
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