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Zain Aalamgir
zinda raha main aaj bhi
zinda raha main aaj bhi | ज़िंदा रहा मैं आज भी
- Zain Aalamgir
ज़िंदा
रहा
मैं
आज
भी
यारों
ग़ज़ब
की
बात
है
मज़लूम
है
बख़्शा
गया
क्या
ख़ूब-सूरत
रात
है
- Zain Aalamgir
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दिन
में
मिल
लेते
कहीं
रात
ज़रूरी
थी
क्या?
बेनतीजा
ये
मुलाक़ात
ज़रूरी
थी
क्या
मुझ
सेे
कहते
तो
मैं
आँखों
में
बुला
लेता
तुम्हें
भीगने
के
लिए
बरसात
ज़रूरी
थी
क्या
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Abrar Kashif
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सोचता
हूँ
कि
उस
की
याद
आख़िर
अब
किसे
रात
भर
जगाती
है
Jaun Elia
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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जैसे
कोई
रोता
है
गले
प्यार
से
लग
कर
कल
रात
मैं
रोया
तेरी
दीवार
से
लग
कर
Aziz Ejaaz
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तेरे
बिन
घड़ियाँ
गिनी
हैं
रात
दिन
नौ
बरस
ग्यारह
महीने
सात
दिन
Rehman Faris
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इक
रात
उस
ने
चंद
सितारे
बुझा
दिए
उस
को
लगा
था
कोई
उन्हें
गिन
नहीं
रहा
Khurram Afaq
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दिन
सलीक़े
से
उगा
रात
ठिकाने
से
रही
दोस्ती
अपनी
भी
कुछ
रोज़
ज़माने
से
रही
Nida Fazli
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ग़ज़ब
किया
तिरे
वअ'दे
पे
ए'तिबार
किया
तमाम
रात
क़यामत
का
इंतिज़ार
किया
Dagh Dehlvi
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चूँकि
रोना
बहाल
रहता
है
ख़ुश्क
आँखों
का
हाल
रहता
है
नींद
आँखों
से
क्यूँँ
गुरेज़ा
है
रात
भर
ये
सवाल
रहता
है
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Sumit Panchal
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बिगड़
गई
थी
जो
दुनिया
सॅंवार
दी
हमने
चढ़ा
के
सर
पे
मुहब्बत
उतार
दी
हमने
अँधेरी
रात
किसी
बे-वफ़ा
की
यादों
में
बहुत
तवील
थी
लेकिन
गुज़ार
दी
हमने
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Hameed Sarwar Bahraichi
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फिर
आँसुओं
ने
आँख
को
कर
अलविदा
फिर
अजनबी
इस
बार
अपनों
ने
किया
Zain Aalamgir
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पता
चलने
न
देना
तुम
किसी
को
ये
कभी
बातें
अगर
पूछे
अचानक
कोई
तुम
सेे
"कौन
सी
बातें"
Zain Aalamgir
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झपके
पलक,
बदले
वरक
कैलेंडरों
के
तब
यहाँ
लेकिन
हक़ीक़त
ज़ीस्त
की,
तारीख़
में
गुम
है
किसी
Zain Aalamgir
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मौसम-ए-ग़म
रहते
यहाँ
हम
सेे
न
रोया
जाएगा
रख
ख़्वाब
पलकों
पर
कभी
हम
सेे
न
सोया
जाएगा
लाशें
दफ़न
होते
कई
देख़ी
न
गिन
कोई
सके
डर
बंद
आँखों
से
कभी
हम
सेे
न
खोया
जाएगा
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Zain Aalamgir
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ये
शहर
शोर-शराबा
बहुत
सुनाता
है
मगर
पुकारूँ
किसे
तो
सुकूत
काफ़ी
है
Zain Aalamgir
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