samajh baitha vo aakhir na-samajh mujh ko | समझ बैठा वो आख़िर ना-समझ मुझ को

  - Zaan Farzaan
समझबैठावोआख़िरना-समझमुझको
मैंजिसकोख़ूबकहताथासमझमुझको
बड़ाआसानथाशायदसमझनापर
बड़ीहीदेरमेंआयासमझमुझको
बढ़ाकरप्यासवोमेरीलगाकहने
मैंदरियाहूँमगरसहरासमझमुझको
जिसेआँखेंकभीसमझानहींपाईं
भलाउससेमैंक्यूँँकहतासमझमुझको
ख़ुदसफ़र्ज़करकुछभीमिरेबारे
मैंजैसाहूँकभीवैसासमझमुझको
मैंतुझसेभीकक्यूँँमाँगूँमोहब्बतकी
इतनाभीगयागुज़रासमझमुझको
अगररिश्तेमेंहोजाएफ़ज़ीहतआम
तोउसरिश्तेसेवारस्तासमझमुझको
ब-जुज़रबकेयहाँहैआरज़ीहरसाथ
कम-अज़-कमगयाइतनासमझमुझको
येदिलकाटूटनाभीलाज़मीथाज़ान
कभीआतीनहींवरनासमझमुझको
  - Zaan Farzaan
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