jatan kar ke bhi jab vo shay mili hi nain | जतन कर के भी जब वो शय मिली ही नइं

  - Zaan Farzaan
जतनकरकेभीजबवोशयमिलीहीनइं
तोकहडालाकिहाजतहमकोथीहीनइं
अगरचेतूसमझताहैमिरीहरबात
मगरवोबातजोअबतककहीहीनइं
तअल्लुक़वोबलाहैजोअगरटूटे
लगेकुछदिनकिअबतोज़िंदगीहीनइं
जोकरडालातिरीआदतकोमैंनेतर्क
किसीकीफिरमुझेआदतलगीहीनइं
वफ़ासीखेकोईमेरीउदासीसे
येजोआकरकभीवापसगईहीनइं
जोतेरेबादअबआईहैख़ल्वतमें
कोईइससेबड़ीआसूदगीहीनइं
जहाँकोछोड़जबतरजीहदीख़ुदको
जहाँमुझकोलगाफिरलाज़मीहीनइं
रहीहैंमुश्किलेंकाफ़ीसफ़रमेंपर
कभीभीख़्वाहिश-ए-मंज़िलमरीहीनइं
वोक्यादिनथेअज़ीज़इकआरज़ूथीज़ान
परअबवोआरज़ूबाक़ीरहीहीनइं
  - Zaan Farzaan
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