तिरेहाथोंसेयूँँछोड़ागयाहूँमैं
किअबतोहरतरफ़बिखरापड़ाहूँमैं
हरानाज़िंदगीआसाँनहींइतना
बहुतगिरकरज़मींसेतोउठाहूँमैं
जिसेयूँँहीरखारहनेदियाहोबस
तिरेलबतकनआईवोदवाहूँमैं
समयकाफ़ैसलाहक़मेंनहींवर्ना
उड़ाइकबारजोफिरतोहवाहूँमैं
कभीमहसूसकरनाअपनीसाँसोंमें
किलेतासाँसक्याअबभीबचाहूँमैं
हरायावक़्तकेहाथोंगयाबेशक
मगरतेरेलिएअबभीबड़ाहूँमैं
यहीतेरानहींइकग़मयहाँअबतो
तमाशेकितनेथेजिनसेलड़ाहूँमैं
वोअपनीरौशनीअक्सरदिखाताहै
कभीरौशनजिसेकरतेबुझाहूँमैं
उदासीकेपरेभीदुनियाकोईथी
जिसेख़्वाबोंकामंज़रकहरहाहूँमैं
वहाँतूजानहींसकताकभीसुनले
कहींफिरजिसबुलंदीसेगिराहूँमैं
ख़ुशीसेशहरसाराघूमाहैफिरआज
मगरउसइकगलीसेतोख़फ़ाहूँमैं
हुआक्याहैदिवानेपनकोमेरेअब
नजानेउससेेक्यूँँलड़भिड़रहाहूँमैं