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Karan Shukla
jo hogii raushni dil men diwali ham manaaenge
jo hogii raushni dil men diwali ham manaaenge | जो होगी रौशनी दिल में दिवाली हम मनाएँगे
- Karan Shukla
जो
होगी
रौशनी
दिल
में
दिवाली
हम
मनाएँगे
तुम्हें
अच्छी
जो
लगती
हो
मिठाई
हम
खिलाएँगे
नहीं
भरना
मिरे
हिस्से
का
रंगोली
में
कोई
रंग
उन्हीं
रंगों
से
मेरी
ज़िंदगी
में
रंग
आएँगे
- Karan Shukla
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छोड़कर
तन्हा
मुझे
जन्नत
में
रहने
लग
गए
हो
और
मैंने
ज़िन्दगीं
कर
ली
जहन्नम
शा'इरी
में
"Nadeem khan' Kaavish"
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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तुम्हारी
ज़िंदगी
में
तुम
हमेशा
मुझे
हर
आदमी
में
सुन
सकोगी
सुनोगी
जब
कभी
भी
शे'र
मेरे
तो
ख़ुद
को
शा'इरी
में
सुन
सकोगी
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Sanskar 'Sanam'
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तू
कहानी
ही
के
पर्दे
में
भली
लगती
है
ज़िन्दगी
तेरी
हक़ीक़त
नहीं
देखी
जाती
Akhtar Saeed Khan
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बद-हवा
सेी
है
बे-ख़याली
है
क्या
ये
हालत
भी
कोई
हालत
है
ज़िंदगी
से
है
जंग
शाम-ओ-सहर
मौत
से
शिकवा
है
शिकायत
है
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Chandan Sharma
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तुम्हें
भी
साँस
लेने
की
कमी
हो
तुम्हें
भी
ज़िंदगी
ठुकरा
के
जाए
Ambar
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मौत
ही
इंसान
की
दुश्मन
नहीं
ज़िंदगी
भी
जान
ले
कर
जाएगी
Arsh Malsiyani
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किराए
के
घर
में
गई
ज़िन्दगी
कहाँ
ज़िन्दगी
में
रही
ज़िन्दगी
Umesh Maurya
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दर्द
ऐसा
है
कि
जी
चाहे
है
ज़िंदा
रहिए
ज़िंदगी
ऐसी
कि
मर
जाने
को
जी
चाहे
है
Kaleem Aajiz
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ज़िंदगी
एक
फ़न
है
लम्हों
को
अपने
अंदाज़
से
गँवाने
का
Jaun Elia
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जेब
अगर
जो
ख़ाली
है
तो
हर
रिश्ता
हावी
है
धोका
तो
देगी
इक
दिन
ये
साँसों
की
गाड़ी
है
हर
ग़लती
के
आगे
अब
तेरा
बस
इक
सारी
है
घर
जाते
डर
लगता
है
वो
मुझ
सेे
फिर
रूठी
है
टूट
गए
जो
हम
तो
क्या
पहली
पहली
बारी
है
हल्के
में
यूँँ
मत
लेना
अब
दुश्मन
की
पारी
है
बाहरस
राधे
राधे
मन
के
अंदर
पापी
है
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Karan Shukla
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यहाँ
देखो
ज़रा
जलवा
हमारा
हमारा
शहर
है
रुतबा
हमारा
हमीं
पर
आज
भारी
पड़
गया
है
मुहब्बत
का
ये
जो
क़िस्सा
हमारा
वो
इतना
ध्यान
ही
रखती
है
वैसे
कि
उस
सेे
जी
रहा
उकता
हमारा
हमारी
भी
अदाकारी
कोई
है
पकड़
लेती
है
वो
बनना
हमारा
बड़ी
चोटें
हैं
खाई
ज़िंदगी
में
बता
सबको
रहा
चेहरा
हमारा
कोई
भी
देखने
वाला
नहीं
है
बहुत
वीरान
है
कमरा
हमारा
हिला
सकता
है
अच्छे
अच्छों
को
फिर
किसी
झगड़े
में
यूँँ
पड़ना
हमारा
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Karan Shukla
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मेरा
साहिल
कोई
और
है
मुझे
हासिल
कोई
और
है
मुझे
अब
देखकर
रो
मत
तेरे
क़ाबिल
कोई
और
है
ये
तो
हालात
हैं
वरना
मिरी
मंज़िल
कोई
और
है
बहादुर
हैं
ये
रोते
लोग
यहाँ
बुज़दिल
कोई
और
है
जहाँ
तुम
थे
'करन'
देखो
वहाँ
दाख़िल
कोई
और
है
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Karan Shukla
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अब
किसी
से
तो
क्या
शिकवा
है
जब
ख़ुद
से
अपना
शिकवा
है
इतना
सब
कुछ
मिलने
पर
भी
रब
से
दुनिया
का
शिकवा
है
दहेज़
छोड़ो
बेटी
दे
दी
अब
और
साहब
क्या
शिकवा
है
याद
बहुत
आते
हो
अब
तुम
ये
उसका
कैसा
शिकवा
है
जिसकी
गोद
में
सर
रखते
थे
अब
उस
सेे
मिलना
शिकवा
है
उनकी
नज़र
से
देखो
मुझको
तो
क़तरा
क़तरा
शिकवा
है
अब
लड़ता
फिर
रहा
मैं
उस
सेे
ज़हर
न
खाने
का
शिकवा
है
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Karan Shukla
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अगर
तस्वीर
जो
तेरी
हटा
दूँगा
तो
अपने
आप
को
ही
फिर
सज़ा
दूँगा
नहीं
होना
इसे
लेकर
परेशाँ
तू
तिरे
इज़हार
का
वो
ख़त
जला
दूँगा
बिछड़ते
वक़्त
तुमको
दूर
तक
देखे
भला
सोचो
तुम्हें
कैसा
भुला
दूँगा
बिगाड़ा
है
उसी
इक
दोस्त
ने
मुझको
जो
कहता
था
तुझे
क़ाबिल
बना
दूँगा
उसे
भी
बद्दुआ
लगती
यहाँ
जिस
सेे
कहाँ
सबने
हो
तुझको
मैं
दु'आ
दूँगा
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