KHud se hi guftugoo umr-bhar tak rahi | ख़ुद से ही गुफ़्तुगू उम्र-भर तक रही

  - Wasim Jamshedpuri
ख़ुदसेहीगुफ़्तुगूउम्र-भरतकरही
गुफ़्तकीगूँजदिलसेनगरतकरही
हमथेलैलाकेपहलूमेंतबरात-भर
रातवोजोहयात-ए-बसरतकरही
हमनेख़ुदकोअभीख़ुदपेखोलानहीं
रहगुज़रकीसदारहगुज़रतकरही
हममेंउल्फ़तरफ़ाक़तरहीकुछनहीं
दर्दकीआहख़ून-ए-जिगरतकरही
अबदवातोदवाथीहमेंदर्ददी
लुत्फ़हीलुत्फ़हममेंअसरतकरही
बाग़बानीसेतयफ़ाइदायेहुआ
तुख़्ममिट्टीमेंतुर्बतशजरतकरही
  - Wasim Jamshedpuri
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