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Vishakt ki Kalam se
jalaakar raakh kar deta s
jalaakar raakh kar deta s | जलाकर राख कर देता सभी को
- Vishakt ki Kalam se
जलाकर
राख
कर
देता
सभी
को
तुझे
देखा
नहीं
होता
अभी
जो
- Vishakt ki Kalam se
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उजाले
को
निराला
बोलते
हैं
हज़ारों
का
हिबाला
खोलते
हैं
नशें
ने
हाथ
जोड़े
है
उन्हें
तो
उन्हीं
नज़रों
को
प्याला
बोलते
हैं
कईं
शायर
बनाएँ
हैं
उन्होंने
उन्हें
तो
सब
क़िताला
बोलते
हैं
हवा
भी
दूर
है
अब
उस
गली
से
गली
को
भी
रिज़ाला
बोलते
हैं
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उसकी
आँखें
रब
की
आँखें
उसका
चेहरा
रब
का
चेहरा
उसको
देखे
सब
की
आँखें
उस
सेे
कह
दो
कर
ले
पहरा
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दवा
ये
ज़हर
जैसी
लग
रही
है
उसी
के
हाथ
की
ख़ुशबू
है
इस
में
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ख़्वाब
लिख
कर
सो
गया
था
ख़्वाब
में
ही
खो
गया
था
ख़्वाब
पूरा
हो
न
पाया
ख़्वाब
में
जो
हो
गया
था
रो
नहीं
पाया
कभी
जो
ख़्वाब
में
वो
रो
गया
था
ऑंसुओ
से
आँख
धोई
पाप
अपने
धो
गया
था
बाक़ियों
की
ख़ैर
मुझ
सेे
पूछ
कर
वो
जो
गया
था
हाॅं
वही
तो
था
खिलाड़ी
खेल
दिल
से
जो
गया
था
जो
यहाॅं
काॅंटे
बिछे
हैं
बीज़
वो
ही
बो
गया
था
क्या
हुआ
जो
मर
गया
वो
ठीक
था
जब
वो
गया
था
ख़्वाब
पूरा
हो
तभी
वो
नींद
गहरी
सो
गया
था
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किसी
दिन
पास
बैठो
तुम
हमारे
मिटा
दो
ये
समुंदर
के
किनारे
नहीं
कुछ
ख़ास
है
अब
इस
किनारे
हमें
भी
साथ
ले
जा
उस
किनारे
हमारी
बात
की
क़ीमत
जहाँ
हो
जहाँ
सब
ख़ास
हों
अपने
हमारे
मुझे
तू
साथ
ले
चल
उस
किनारे
जहाँ
सब
जी
रहे
तेरे
सहारे
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