zakhami dil | "ज़ख़्मी दिल"

  - Virendra Sharma
"ज़ख़्मीदिल"
एकज़ख़्मपुरानाभरानहींथा
आजफिरसेकिसीनेदिलपरचोटदेमारीहैयारों
हालमेरापूछकरउसनेअपनेहीअंदाज़से
दिलपरदस्तकदीहैयारों
कैसेइलाजकराएअबइसदिलका
बचानाहैशहरमेंकोईहकीमइसका
कोईशायर,हीकोईग़ज़लदीवानायारों
मैंख़ुदहीलिखरहाहूँयहहालमेरा
तुमहालातमेरेसमझजानायारों
  - Virendra Sharma
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