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Gulshan
dil ko itni badi saza dooñga
dil ko itni badi saza dooñga | दिल को इतनी बड़ी सज़ा दूँगा
- Gulshan
दिल
को
इतनी
बड़ी
सज़ा
दूँगा
उसकी
तस्वीर
भी
जला
दूँगा
- Gulshan
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हंगामा
है
क्यूँँ
बरपा
थोड़ी
सी
जो
पी
ली
है
डाका
तो
नहीं
मारा
चोरी
तो
नहीं
की
है
Akbar Allahabadi
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कोई
समझे
तो
एक
बात
कहूँ
इश्क़
तौफ़ीक़
है
गुनाह
नहीं
Firaq Gorakhpuri
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यूँँ
ज़िंदगी
गुज़ार
रहा
हूँ
तिरे
बग़ैर
जैसे
कोई
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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मुझे
पहले
पहल
लगता
था
ज़ाती
मसअला
है
मैं
फिर
समझा
मोहब्बत
क़ायनाती
मसअला
है
परिंदे
क़ैद
हैं
तुम
चहचहाहट
चाहते
हो
तुम्हें
तो
अच्छा
ख़ासा
नफ़सयाती
मसअला
है
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Umair Najmi
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फ़रेब
दे
गया
इस
सादगी
से
वो
मुझको
कि
जुर्म
सारा
ही
मजबूरियों
के
सर
आया
Harsh saxena
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जुर्म
में
शामिल
रहेंगे
खिड़कियाँ,
दीवार,
छत
और
फिर
औरत
की
अस्मत
कुंडियाँ
ले
जाएंगी
Ravi 'VEER'
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ख़ूब-सूरत
ये
मोहब्बत
में
सज़ा
दी
उसने
फिर
गले
मिलके
मेरी
उम्र
बढ़ा
दी
उसने
Manzar Bhopali
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तोड़
कर
तुझको
भला
मेरा
भी
क्या
बन
जाता
उल्टा
मैं
ख़ुद
की
मुहब्बत
प
सज़ा
बन
जाता
जितनी
कोशिश
है
तिरी
एक
तवज्जोह
के
लिए
उस
सेे
कम
में
तो
मैं
दुनिया
का
ख़ुदा
बन
जाता
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Ashutosh Vdyarthi
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तेरी
आँखों
के
लिए
इतनी
सज़ा
काफ़ी
है
आज
की
रात
मुझे
ख़्वाब
में
रोता
हुआ
देख
Abhishek shukla
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सफ़र
को
बीच
में
हम
छोड़कर
वापस
चले
आते
इशारा
लौट
आने
का
किसी
ने
तो
किया
होता
Gulshan
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बिखर
जाने
की
नौबत
आ
गई
है
कहाँ
लेकर
ये
क़िस्मत
आ
गई
है
मुहब्बत
की
हुई
आमद
है
जब
से
बड़ी
जीने
में
लज़्ज़त
आ
गई
है
वो
सज
कर
रूबरू
आए
हैं
ऐसे
समझ
लो
बस
क़यामत
आ
गई
है
मुहब्बत
का
चला
जादू
है
शायद
तभी
चेहरे
पे
रंगत
आ
गई
है
पराए
हो
गए
अपने
भी
जब
से
हमारे
घर
में
ग़ुर्बत
आ
गई
है
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Gulshan
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तुझे
पाकर
ज़माने
की
वफ़ा
अच्छी
नहीं
लगती
सिवा
तेरे
किसी
की
भी
अदा
अच्छी
नहीं
लगती
Gulshan
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दुखों
को
सुख
बताया
जा
रहा
है
यूँँ
रोते
को
हँसाया
जा
रहा
है
दुखी
लाचार
बेबस
लोग
हैं
जो
उन्हें
बेहद
सताया
जा
रहा
है
जहाँ
पर
बाँटते
हैं
दर्द
काँटे
वहाँ
पर
गुल
खिलाया
जा
रहा
है
उजाले
के
लिए
दीपक
जलाकर
अँधेरे
को
मिटाया
जा
रहा
है
मिले
थे
ज़ख़्म
जिसके
प्यार
में
ये
उसे
दिल
में
बसाया
जा
रहा
है
हटाने
थे
सभी
सन्देह
'गुलशन'
भरोसा
क्यूँ
उठाया
जा
रहा
है
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Gulshan
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जब
भी
मिलते
हैं
तहे
दिल
से
दु'आ
देते
हैं
ऐसे
होते
हैं
मोहब्बत
को
निभाने
वाले
Gulshan
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