sabr men dhalti hue din ki mere vo shaam ho tum | सब्र में ढलते हुए दिन की मेरे वो शाम हो तुम

  - Umashankar Lekhwar
सब्रमेंढलतेहुएदिनकीमेरेवोशामहोतुम
ज़िन्दगीकीदौड़मेंदोपलमिलाआरामहोतुम
देखकरतुमकोमेरीआँखेंकभीथकतीनहींहैं
क्यूँतलबहैयेमुझेजैसेकिकोईजामहोतुम
वोमेरेभीतरलिखाहैऔरशायदहीमिटेगा
मुस्कुराजाऊँजिसेसुनकेकहींवोनामहोतुम
मैंतुम्हेंहीयादकरतादेखकरजबभीगुज़रता
नामसेभीजोमेरेवाक़िफ़वोअंजामहोतुम
  - Umashankar Lekhwar
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