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Tiwari Jitendra
muhabbat kyuuñ jataata hi nahin hai
muhabbat kyuuñ jataata hi nahin hai | मुहब्बत क्यूँ जताता ही नहीं है
- Tiwari Jitendra
मुहब्बत
क्यूँ
जताता
ही
नहीं
है
किसी
कूचे
में
जाता
ही
नहीं
है
सफ़र
तन्हा
अकेला
कट
गया
है
कोई
उलफ़त
निभाता
ही
नहीं
है
ग़मों
को
और
गहरा
कर
रहें
हैं
कोई
मरहम
लगाता
ही
नहीं
है
कहा
करता
था
बस
आवाज़
देना
बुलाने
पे
जो
आता
ही
नहीं
है
यहाँ
मैं
याद
में
मरता
हूँ
उसके
मेरा
दिल
क्यूँ
भुलाता
ही
नहीं
है
सितारे
लूट
बैठे
चाँदनी
को
कोई
दीपक
जलाता
ही
नहीं
है
परिंदे
प्यार
करते
हैं
मुझी
से
तिवारी
दिल
दुखाता
ही
नहीं
है
- Tiwari Jitendra
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के
'हैलो'
सुनते
ही
कट
कर
दिया
है
उसने
मेरा
फ़ोन
ख़ुदा
का
शुक्र
है
आवाज़
तो
पहचानता
है
वो
Zubair Ali Tabish
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तेरी
आवाज़
को
इस
शहर
की
लहरें
तरसती
हैं
ग़लत
नंबर
मिलाता
हूँ
तो
पहरों
बात
होती
है
Ghulam Mohammad Qasir
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तेरी
आवाज़
मेरा
रिज़्क
हुआ
करती
थी
तू
मुझे
भूख
से
मारेगा
ये
सोचा
नहीं
था
Rafi Raza
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बाज़ार
जा
के
ख़ुद
का
कभी
दाम
पूछना
तुम
जैसे
हर
दुकान
में
सामान
हैं
बहुत
आवाज़
बर्तनों
की
घर
में
दबी
रहे
बाहर
जो
सुनने
वाले
हैं,
शैतान
हैं
बहुत
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Aalok Shrivastav
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बिछड़कर
उसका
दिल
लग
भी
गया
तो
क्या
लगेगा
वो
थक
जाएगा
और
मेरे
गले
से
आ
लगेगा
मैं
मुश्किल
में
तुम्हारे
काम
आऊँ
या
ना
आऊँ
मुझे
आवाज़
दे
लेना
तुम्हें
अच्छा
लगेगा
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Tehzeeb Hafi
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गर
कोई
मुझ
सेे
आकर
कहता,
यार
उदासी
है
मैं
उसको
गले
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
होता
दरवेश
अगर
मैं
तो
फिर
सारी
दो-पहरी
गलियों
में
सदा
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
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Siddharth Saaz
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आवाज़
दे
के
देख
लो
शायद
वो
मिल
ही
जाए
वर्ना
ये
उम्र
भर
का
सफ़र
राएगाँ
तो
है
Muneer Niyazi
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दर्द
ऐसा
नजरअंदाज
नहीं
कर
सकते
जब्त
ऐसा
की
हम
आवाज
नहीं
कर
सकते
बात
तो
तब
थी
कि
तू
छोड़
के
जाता
ही
नहीं
अब
तेरे
मिलने
पे
हम
नाज
नहीं
कर
सकते
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Ismail Raaz
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मेरी
ख़ामोशियों
में
लर्ज़ां
है
मेरे
नालों
की
गुम-शुदा
आवाज़
Faiz Ahmad Faiz
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जब
उसने
पलट
कर
नहीं
देखा
तो
ये
जाना
आवाज़
लगाने
में
भी
नुक़सान
बहुत
है
Imtiyaz Khan
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मुझे
तस्कीन
करना
है
अभी
तो
उसे
बाहों
में
भरना
है
अभी
तो
मोहब्बत
मार
देती
हैं
सभी
को
मुझे
नफ़रत
से
मरना
है
अभी
तो
कहीं
दिल
टूट
न
जाए
सँभल
कर
मोहब्बत
सोच
डरना
है
अभी
तो
'तिवारी'
दुश्मनी
तुम
सेे
नहीं
है
मुझे
तो
बात
करना
है
अभी
तो
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Tiwari Jitendra
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दुश्मनी
मैं
सभी
से
कर
लेता
प्यार
खैरात
में
नहीं
रखता
Tiwari Jitendra
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मर
गया
हूँ
मैं
किसी
की
दिल-लगी
में
ख़ाक
है
बस
जिस्म
मेरी
ज़िंदगी
में
मैं
रहा
हूँ
एक
दरिया
इक
सदी
में
दिल
तड़पता
है
अभी
भी
तिश्नगी
में
कुछ
नहीं
था
यार
उसके
पास
मैं
था
आज
सब
कुछ
है
नहीं
मैं
ज़िंदगी
में
मैं
समझता
था
ख़ुदा
उसको
तभी
तो
जी
रहा
था
मैं
उसी
की
बंदगी
में
जीत
तुमको
है
ज़माने
सा
बदलना
जी
नहीं
पाओगे
इतनी
सादगी
में
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Tiwari Jitendra
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अभी
तक
बह
रहा
है
ख़ून
मेरा
निशां
उसके
मिटाना
चाहता
था
Tiwari Jitendra
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कुछ
अधूरे
से
ख़्वाब
मिलते
हैं
प्यार
में
बस
अज़ाब
मिलते
हैं
हमने
दरिया
निचोड़
डाला
है
उसको
आँखों
से
आब
मिलते
हैं
उम्र
भर
प्यार
कौन
करता
है
वक़्त
रहते
गुलाब
मिलते
हैं
चैट
पे
कब
तलक
गुज़ारें
दिन
उसने
बोला
जनाब
मिलते
हैं
देखने
को
जिसे
चला
आया
वो
पहन
कर
हिजाब
मिलते
हैं
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Tiwari Jitendra
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