purane gham bhulaane men ziyaada kuchh nahin lagta | पुराने ग़म भुलाने में ज़ियादा कुछ नहीं लगता

  - Saurabh Mehta 'Alfaaz'
पुरानेग़मभुलानेमेंज़ियादाकुछनहींलगता
कोईपूछेतोकहनावोहमाराकुछनहींलगता
नईरुस्वाइयाँहरबारमुझसेेमिलनेआतीहैं
मुझेउसकीमोहब्बतमेंपुरानाकुछनहींलगता
नज़रअंदाज़कर-करकेतुमअपनाक़दबढ़ातेहो
हमारीजानजातीहैतुम्हाराकुछनहींलगता
ज़राइकहाथबढ़जाएतोशायदथामभीलेंहम
हमाराख़ुदसेहोकरतोइरादाकुछनहींलगता
येकैसानूरहैउन
मेंकेबसदेखेहीजातेहैं
अबइनआँखोंकोयेशोलाशराराकुछनहींलगता
तुम्हेंसमझारहाहूँफिरकेसौदाफ़ायदेकाहै
किसीकेदिलमेंघरकरकेकिरायाकुछनहींलगता
कभी'अल्फ़ाज़'टूटेंतोबिखरजातेहैंमिसरोंपर
ग़ज़लगोईमेंवैसेतोहमाराकुछनहींलगता
  - Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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