karvat pe karvat ye surur-e-nafas ho shaayad | करवट पे करवट ये सुरूर-ए-नफ़स हो शायद

  - komal selacoti
करवटपेकरवटयेसुरूर-ए-नफ़सहोशायद
बिस्तरमेंअबकेआख़िरीबरसहोशायद
जुर्म-ए-मोहब्बतमेंतोबसजाँजानीहैदोस्त
तुमबचनिकलेहोतोअहल-ए-हवसहोशायद
मेरेगलेमेंगरतेरीसाँसेंहैंदिलबर
तेरीकलाईमेंभीमेरीनसहोशायद
मौलातेरीनगरीमेंहैबड़ाख़ौफ़-ए-मौत
रिंदोंकीबस्तीमेंख़ाकचरसहोशायद
कहतेरहतेहोदिनभरपत्थरकोपत्थर
कोमलकहकेदेखोटससेमसहोशायद
  - komal selacoti
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