parwaz-e-hasti ka manzar-e-aakhir hote hote | परवाज़-ए-हस्ती का मंज़र-ए-आख़िर होते होते

  - komal selacoti
परवाज़-ए-हस्तीकामंज़र-ए-आख़िरहोतेहोते
हमतोपैरोंसेज़ंजीरबनेफिरहोतेहोते
यूँँहीमक़्तल-ए-दुनियामेंहमजानबचाफिरतेहैं
मरहीजानाहैंजबहमकोशातिरहोतेहोते
सूरत-ए-हालतमाशाईनेख़ूबज़बाँसेचाटी
चश्म-ए-पुर-नमपेख़ून-ए-दिलज़ाहिरहोतेहोते
हैबर्क़-ए-हुस्न-ओ-क़ामतऔरऐसेनाज़ुकअक़्दाम
माशा-अल्लाहकहदियाहैकाफ़िरहोतेहोते
घरसेबाँधेनिकलेथेतज्रिबा-ए-उलफ़तक्यूँँकर
काममिलाथाकार-ए-जफ़ामेंमाहिरहोतेहोते
साबितकरनीथीअपनीबेदारीऔरबेचैनी
सोजबरनफिसलेतिरेदरपेहाज़िरहोतेहोते
  - komal selacoti
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