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Sultan shaafi
einte girti hain mere jism ki lamha lamha
einte girti hain mere jism ki lamha lamha | ईंटे गिरती हैं मेरे जिस्म की लम्हा लम्हा
- Sultan shaafi
ईंटे
गिरती
हैं
मेरे
जिस्म
की
लम्हा
लम्हा
ऐसा
लगता
है
कोई
तोड़
रहा
है
मुझको
- Sultan shaafi
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कभी
मिलता
नहीं
क्यूँ
मुझ
को
मुझ
में
कहाँ
है
गर
मेरे
अंदर
ख़ुदा
है
भटकती
है
कहीं
और
ही
मेरी
रूह
बदन
मेरा
कहीं
और
ही
पड़ा
है
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Chandan Sharma
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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रंग-ओ-रस
की
हवस
और
बस
मसअला
दस्तरस
और
बस
यूँँ
बुनी
हैं
रगें
जिस्म
की
एक
नस
टस
से
मस
और
बस
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Ammar Iqbal
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उस
साँवले
से
जिस्म
को
देखा
ही
था
कि
बस
घुलने
लगे
ज़बाँ
पे
मज़े
चाकलेट
के
Shahid Kabir
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अभी
हमको
मुनासिब
आप
होते
से
नहीं
लगते
ब–चश्म–ए–तर
मुख़ातिब
हैं
प
रोते
से
नहीं
लगते
वही
दर्या
बहुत
गहरा
वही
तैराक
हम
अच्छे
हुआ
है
दफ़्न
मोती
अब
कि
गोते
से
नहीं
लगते
ये
आई
रात
आँखों
को
चलो
खूँ–खूँ
किया
जाए
बदन
ये
सो
भी
जाए
आँख
सोते
से
नहीं
लगते
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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जिस्म
आया
किसी
के
हिस्से
में
दिल
किसी
और
की
अमानत
है
Shariq Kaifi
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किसी
कली
किसी
गुल
में
किसी
चमन
में
नहीं
वो
रंग
है
ही
नहीं
जो
तिरे
बदन
में
नहीं
Farhat Ehsaas
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कुछ
इस
सलीक़े
से
माथे
पे
उसने
होंट
रखे
बदन
को
छोड़
के
सारी
थकन
को
चूम
लिया
Harsh saxena
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एक
मुद्दत
से
परिंदे
की
तरह
ये
क़ैद
है
रूह
मेरे
जिस्म
से
'क़ासिद'
रिहा
होती
नहीं
Gurbir Chhaebrra
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मेरे
जिस्म
से
वक़्त
ने
कपड़े
नोच
लिए
मंज़र
मंज़र
ख़ुद
मेरी
पोशाक
हुआ
Azm Shakri
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अपनी
दुनिया
सँवार
लेते
हैं
आप
को
जो
निहार
लेते
हैं
ख़ुद
को
करते
है
मुब्तिला
दुख
में
और
ख़ुद
को
पुकार
लेते
हैं
लोग
ख़ुद
को
तबाह
करने
को
मुझ
सेे
वहशत
उधार
लेते
हैं
कैफ़ियत
में
तुझे
पहनते
हैं
और
ख़ुद
को
उतार
लेते
हैं
उसके
बिन
रात
तो
क़यामत
है
हाँ
मगर
दिन
गुज़ार
लेते
हैं
आ
कि
अब
ख़त्म
कर
दे
ये
रिश्ता
अपनी
ग़लती
सुधार
लेते
है
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Sultan shaafi
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जवानी
में
कदम
है
और
हम
को
दवाई
खा
के
जीना
पड़
रहा
है
Sultan shaafi
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तुझे
भी
यूँँ
ही
लगेंगा
कि
दोनों
जुड़वा
हैं
तू
मेरी
शक्ल
से
सूरत
मिला
उदासी
की
Sultan shaafi
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सितमगर
के
जब
से
सितम
रुक
गए
हैं
ग़ज़ल
थम
गई
है
क़लम
रुक
गए
हैं
मेरे
शहर
में
आ
के
वो
ग़ैर
के
घर
चलो
शुक्र
है
कम
से
कम
रुक
गए
हैं
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Sultan shaafi
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हालात
पे
उसके
मुझे
आ
जाता
है
रोना
इक
शख़्स
जो
रहता
है
अकेला
मेरे
अंदर
Sultan shaafi
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