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Sultan shaafi
apni duniya sanwaar lete hain
apni duniya sanwaar lete hain | अपनी दुनिया सँवार लेते हैं
- Sultan shaafi
अपनी
दुनिया
सँवार
लेते
हैं
आप
को
जो
निहार
लेते
हैं
ख़ुद
को
करते
है
मुब्तिला
दुख
में
और
ख़ुद
को
पुकार
लेते
हैं
लोग
ख़ुद
को
तबाह
करने
को
मुझ
सेे
वहशत
उधार
लेते
हैं
कैफ़ियत
में
तुझे
पहनते
हैं
और
ख़ुद
को
उतार
लेते
हैं
उसके
बिन
रात
तो
क़यामत
है
हाँ
मगर
दिन
गुज़ार
लेते
हैं
आ
कि
अब
ख़त्म
कर
दे
ये
रिश्ता
अपनी
ग़लती
सुधार
लेते
है
- Sultan shaafi
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वक़्त
की
गर्दिशों
का
ग़म
न
करो
हौसले
मुश्किलों
में
पलते
हैं
Mahfuzur Rahman Adil
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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अपनी
हालत
का
ख़ुद
एहसास
नहीं
है
मुझ
को
मैं
ने
औरों
से
सुना
है
कि
परेशान
हूँ
मैं
Aasi Uldani
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यही
बहुत
है
मिरे
ग़म
में
तुम
शरीक
हुए
मैं
हॅंस
पड़ूँगा
अगर
तुमने
अब
दिलासा
दिया
Imran Aami
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मेरी
बरसों
की
उदासी
का
सिला
कुछ
तो
मिले
उस
से
कह
दो
वो
मेरा
क़र्ज़
चुकाने
आए
Khalil Ur Rehman Qamar
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अब
कारगह-ए-दहर
में
लगता
है
बहुत
दिल
ऐ
दोस्त
कहीं
ये
भी
तिरा
ग़म
तो
नहीं
है
Majrooh Sultanpuri
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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आधी
से
ज़ियादा
शब-ए-ग़म
काट
चुका
हूँ
अब
भी
अगर
आ
जाओ
तो
ये
रात
बड़ी
है
Saqib lakhanavi
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पत्थर
के
जिगर
वालो
ग़म
में
वो
रवानी
है
ख़ुद
राह
बना
लेगा
बहता
हुआ
पानी
है
Bashir Badr
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ग़म
है
तो
कोई
लुत्फ़
नहीं
बिस्तर-ए-गुल
पर
जी
ख़ुश
है
तो
काँटों
पे
भी
आराम
बहुत
है
Kaleem Aajiz
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जवानी
में
कदम
है
और
हम
को
दवाई
खा
के
जीना
पड़
रहा
है
Sultan shaafi
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सितमगर
के
जब
से
सितम
रुक
गए
हैं
ग़ज़ल
थम
गई
है
क़लम
रुक
गए
हैं
मेरे
शहर
में
आ
के
वो
ग़ैर
के
घर
चलो
शुक्र
है
कम
से
कम
रुक
गए
हैं
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Sultan shaafi
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तुझे
भी
यूँँ
ही
लगेंगा
कि
दोनों
जुड़वा
हैं
तू
मेरी
शक्ल
से
सूरत
मिला
उदासी
की
Sultan shaafi
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ईंटे
गिरती
हैं
मेरे
जिस्म
की
लम्हा
लम्हा
ऐसा
लगता
है
कोई
तोड़
रहा
है
मुझको
Sultan shaafi
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वहशत
ने
मुझ
हसीन
को
बेहाल
कर
दिया
कमज़ोर
दिल
के
लोग
ना
देखें
मेरी
तरफ़
Sultan shaafi
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