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BR SUDHAKAR
ye rob tu ab doston pe kyuuñ dikhaata hai
ye rob tu ab doston pe kyuuñ dikhaata hai | ये रोब तू अब दोस्तों पे क्यूँ दिखाता है
- BR SUDHAKAR
ये
रोब
तू
अब
दोस्तों
पे
क्यूँ
दिखाता
है
वो
तुझपे
जब
चिल्ला
रही
थी
तब
कहाँ
था
ये
- BR SUDHAKAR
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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जब
भी
कोई
मंज़िल
हासिल
करता
हूँ
याद
बहुत
आती
हैं
तेरी
ता'रीफ़ें
Tanoj Dadhich
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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सुखाई
जा
रही
है
जुल्फ़
धोकर
घटा
या'नी
निचोड़ी
जा
रही
है
Satya Prakash Soni
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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मेरा
बटुआ
नहीं
होता
है
ख़ाली
तेरी
तस्वीर
की
बरकत
रही
माँ
Satya Prakash Soni
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जिस
मौसम
में
भीगना
है
हम
दोनों
को
उस
मौसम
में
पूछ
रही
हो
छाता
है
Zubair Alam
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सिवा
इसके
कुछ
अच्छा
ही
नहीं
लगता
है
शामों
में
सफ़र
कैसा
भी
हो
घर
को
परिंदे
लौट
जाते
हैं
Aarush Sarkaar
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मुझे
एक
लाश
कहकर
न
बहाओ
पानियों
में
मेरा
हाथ
छू
के
देखो
मेरी
नब्ज़
चल
रही
है
Azm Shakri
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दिल
की
तमन्ना
थी
मस्ती
में
मंज़िल
से
भी
दूर
निकलते
अपना
भी
कोई
साथी
होता
हम
भी
बहकते
चलते
चलते
Majrooh Sultanpuri
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हमें
तुम
छोड़
के
जा
भी
रहे
हो
तो
ज़रा
इक
बार
हम
सेे
पूछ
तो
लेते
BR SUDHAKAR
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हम
हैं
दुश्मन
से
ज़िंदगी
और
मैं
हैं
मगर
साथ
ग़म
ख़ुशी
और
मैं
कुछ
अलग
ही
कमाल
कर
देगें
संग
रहकर
ये
ज़िंदगी
और
मैं
जब
से
वो
मुझको
छोड़
के
है
गई
घर
नहीं
लौटे
रोशनी
और
मैं
संग
आँसू
यहाँ,
है
दुख
भी
मगर
हैं
बड़े
तन्हा
ज़िंदगी
और
मैं
हो
गई
अब
तो
शादी
भी
उसकी
रहती
है
वो
ख़ुशी
ख़ुशी
और
मैं
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BR SUDHAKAR
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आज
ही
भेजी
गई
थी
अर्ज़
पर
परियाँ
आज
तो
है
आप
का
भी
'बर्थडे'
है
ना?
©
Sudhakar'
Salim
'
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BR SUDHAKAR
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उसके
बिन
मर
जाएँगे
हमने
कहा
था
अब
हो
कोशिश
क्यूँ?
कि
जब
जीना
ग़लत
है
BR SUDHAKAR
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कभी
आएगा
और
सब
कुछ
मिटा
देगा
ये
मुझको
भी
जो
छुप
के
बैठा
है
अंदर
मेरे,
बाहर
नहीं
आया
BR SUDHAKAR
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