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Sumit Panchal
jazba ae shauq se siva kya hai
jazba ae shauq se siva kya hai | जज़्बा ए शौक़ से सिवा क्या है
- Sumit Panchal
जज़्बा
ए
शौक़
से
सिवा
क्या
है
सर
में
सौदा
नया
नया
क्या
है
इश्क़
करने
में
नेमतें
हैं
तमाम
और
मैं
क्या
बताऊँ
क्या
क्या
है
देख
कर
आपको
ये
सोचता
हूँ
फूल
सा
शाख़
पर
खिला
क्या
है
हर
किसी
को
नहीं
ये
फ़न
हासिल
शे'र
कहता
हूँ
तो
बुरा
क्या
है
- Sumit Panchal
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ये
एक
बात
समझने
में
रात
हो
गई
है
मैं
उस
से
जीत
गया
हूँ
कि
मात
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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ऐसा
नहीं
कि
उन
से
मोहब्बत
नहीं
रही
जज़्बात
में
वो
पहली
सी
शिद्दत
नहीं
रही
Khumar Barabankvi
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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चलते
हुए
मुझ
में
कहीं
ठहरा
हुआ
तू
है
रस्ता
नहीं
मंज़िल
नहीं
अच्छा
हुआ
तू
है
Abhishek shukla
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हासिल
न
कर
पाया
तुझे
मैं
मिन्नतों
के
बाद
भी
उम्मीद
सेंटा
से
लगाना
लाज़मी
भी
है
मिरा
Harsh saxena
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हिम्मत,
ताकत,
प्यार,
भरोसा
जो
है
सब
इनसे
ही
है
कुछ
नंबर
हैं
जिन
पर
मैंने
अक्सर
फोन
लगाया
है
Pratap Somvanshi
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दिल
की
तमन्ना
थी
मस्ती
में
मंज़िल
से
भी
दूर
निकलते
अपना
भी
कोई
साथी
होता
हम
भी
बहकते
चलते
चलते
Majrooh Sultanpuri
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उस
हिज्र
पे
तोहमत
कि
जिसे
वस्ल
की
ज़िद
हो
उस
दर्द
पे
ला'नत
की
जो
अशआ'र
में
आ
जाए
Vipul Kumar
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जब
भी
कोई
मंज़िल
हासिल
करता
हूँ
याद
बहुत
आती
हैं
तेरी
ता'रीफ़ें
Tanoj Dadhich
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जँचने
लगा
है
दर्द
मुझे
आपका
दिया
बर्बाद
करने
वाले
ने
ही
आसरा
दिया
कल
पहली
बार
लड़ने
की
हिम्मत
नहीं
हुई
मुझको
किसी
के
प्यार
ने
बुजदिल
बना
दिया
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Kushal Dauneria
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वा
किसी
दम
मैं
अपने
लब
करता
सामने
उस
के
ऐसा
कब
करता
ला
दवा
था
मरज़
मेरा
फिर
मैं
किस
से
चारागरी
तलब
करता
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Sumit Panchal
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कह
नहीं
पा
रहा
कि
क्या
ग़म
है
लग
रहा
है
कहीं
पे
कुछ
कम
है
Sumit Panchal
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हुई
है
क्या
ख़ता
जाने
चले
नासेह
समझाने
गए
थे
बाब-ए-उल्फ़त
को
वफ़ाओं
का
मज़ा
पाने
हुकुम
होता
ग़ज़ल
का
है
सुना
देते
है
अफ़साने
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Sumit Panchal
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रात
की
बात
तो
और
कुछ
थी
मगर
ये
सवेरे
सवेरे
अँधेरा
घना
Sumit Panchal
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हो
किसी
से
तो
दोस्ती
ऐसी
प्यार
की
हो
जहाँँ
कमी
पूरी
Sumit Panchal
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