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Sandeep Rajput
teer bhi tere khenche bhari pade mujhe
teer bhi tere khenche bhari pade mujhe | तीर भी तेरे खेंचे भारी पड़े मुझे
- Sandeep Rajput
तीर
भी
तेरे
खेंचे
भारी
पड़े
मुझे
ज़ख़्म
भी
तो
तेरे
ही
गहरे
लगे
मुझे
- Sandeep Rajput
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गीत
लिक्खे
भी
तो
ऐसे
के
सुनाएँ
न
गए
ज़ख़्म
यूँँ
लफ़्ज़ों
में
उतरे
के
दिखाएँ
न
गए
आज
तक
रक्खे
हैं
पछतावे
की
अलमारी
में
एक
दो
वादे
जो
दोनों
से
निभाएँ
न
गए
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Farhat Abbas Shah
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आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
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Bhaskar Shukla
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तेरे
लगाए
हुए
ज़ख़्म
क्यूँँ
नहीं
भरते
मेरे
लगाए
हुए
पेड़
सूख
जाते
हैं
Tehzeeb Hafi
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इक
परिंदा
अभी
उड़ान
में
है
तीर
हर
शख़्स
की
कमान
में
है
Ameer Qazalbash
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ये
कैसे
सानिहे
अब
पेश
आने
लग
गए
हैं
तेरे
आग़ोश
में
हम
छटपटाने
लग
गए
हैं
बहुत
मुमकिन
है
कोई
तीर
हमको
आ
लगेगा
हम
ऐसे
लोग
जो
पंछी
उड़ाने
लग
गए
हैं
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Vikram Sharma
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देखा
जो
खा
के
तीर
कमीं-गाह
की
तरफ़
अपने
ही
दोस्तों
से
मुलाक़ात
हो
गई
Hafeez Jalandhari
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अक्सर
ही
ज़ख़्म
इश्क़
में
पाले
हैं
औरतें
पर
कितने
टूटे
मर्द
सँभाले
हैं
औरतें
Abhishar Geeta Shukla
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कोई
मेरे
दिल
से
पूछे
तिरे
तीर-ए-नीम-कश
को
ये
ख़लिश
कहाँ
से
होती
जो
जिगर
के
पार
होता
Mirza Ghalib
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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पुरानी
चाहत
के
ज़ख़्म
अब
तक
भरे
नहीं
हैं
और
एक
लड़की
पड़ी
है
पीछे
बड़े
जतन
से
Ashu Mishra
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जिस
सेे
भी
जो
चाहत
हो,
माँगा
कर
बिन
माँगे,
बस
माँ
खाना
देती
है
Sandeep Rajput
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दिन
भुलाया
मगर
रात
पहरा
रहा
ज़ख़्म
भरने
लगे
दाग़
गहरा
रहा
इस
सफ़र
में
किसे
हम
सेफ़र
हम
कहें
सब
गए
छोड़
कर
वक़्त
ठहरा
रहा
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Sandeep Rajput
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जिसको
था
मैं
कहता
दोस्त
दुश्मन
सा
वो
निकला
दोस्त
उसने
भी
छोड़ा
है
साथ
वो
भी
निकला
दुनिया
दोस्त
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Sandeep Rajput
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मुझे
तुम्हारे
हर
दुख
की
भरपाई
करनी
है
तुम्हें
हमेशा
ख़ुश
रखने
का
वा'दा
करना
है
Sandeep Rajput
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हर
इक
दोस्त
करता
गया
दग़ा
जी
टुकड़ों
में
मारा
गया
मुझे
Sandeep Rajput
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