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Sandeep Rajput
kisi ko kyuuñ dikhaate ho abhii andaaz nafrat ke
kisi ko kyuuñ dikhaate ho abhii andaaz nafrat ke | किसी को क्यूँ दिखाते हो अभी अंदाज़ नफ़रत के
- Sandeep Rajput
किसी
को
क्यूँ
दिखाते
हो
अभी
अंदाज़
नफ़रत
के
यहाँ
पर
गुल
खिले
है
जब
मिरे
जानाँ
मोहब्बत
के
अगर
ढूँढो
तो
मिल
जाए
ख़ुदा
भी
अब
किताबों
में
किताबों
में
नहीं
मिलते
यहाँ
बस
राज़
उल्फ़त
के
- Sandeep Rajput
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हरीम-ए-नाज़
के
पर्दे
में
जो
निहाँ
था
कभी
उसी
ने
शोख़
अदाएँ
दिखा
के
लूट
लिया
Anwar Taban
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जिसका
तारा
था
वो
आँखें
सो
गई
हैं
अब
कहाँ
करता
है
मुझ
पर
नाज़
कोई
Aalok Shrivastav
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तेरी
निगाह-ए-नाज़
से
छूटे
हुए
दरख़्त
मर
जाएँ
क्या
करें
बता
सूखे
हुए
दरख़्त
हैरत
है
पेड़
नीम
के
देने
लगे
हैं
आम
पगला
गए
हैं
आपके
चू
में
हुए
दरख़्त
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Varun Anand
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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दुनिया
भर
की
राम-कहानी
किस
किस
ढंग
से
कह
डाली
अपनी
कहने
जब
बैठे
तो
एक
एक
लफ़्ज़
पिघलता
था
Khalilur Rahman Azmi
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हुस्न
को
हुस्न
बनाने
में
मिरा
हाथ
भी
है
आप
मुझ
को
नज़र-अंदाज़
नहीं
कर
सकते
Rais Farog
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नाज़
क्या
इस
पे
जो
बदला
है
ज़माने
ने
तुम्हें
मर्द
हैं
वो
जो
ज़माने
को
बदल
देते
हैं
Akbar Allahabadi
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है
नाज़
मुझको
अपनी
हिंदी
ज़बाँ
पे
यारो
हिंदी
हैं
हम
वतन
हैं
ये
देश
सब
सेे
आला
Dr Mohsin Khan
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नाज़-ओ-नख़रे
क्या
उठाए,
क्या
सुने
उस
के
गिले
देखते
ही
देखते
लड़की
घमंडी
हो
गई
देखते
रहने
में
उस
को
और
क्या
होता,
मगर
जो
थी
जान-ए-आरज़ू,
वो
चाय
ठंडी
हो
गई
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Kazim Rizvi
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है
राम
के
वजूद
पे
हिन्दोस्ताँ
को
नाज़
अहल-ए-नज़र
समझते
हैं
उस
को
इमाम-ए-हिंद
Allama Iqbal
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मेरे
दिल
में
तेरी
निशानी,
ग़लत
है
ना
आँखों
में
तुम
हो
फिर
ये
पानी,
ग़लत
है
ना
Sandeep Rajput
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जिस
सेे
भी
जो
चाहत
हो,
माँगा
कर
बिन
माँगे,
बस
माँ
खाना
देती
है
Sandeep Rajput
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दुनिया
भर
की
सब
बातें
करती
थी
ये
लड़की
जो
चुप
बैठी
है
कब
से
Sandeep Rajput
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दिन
भुलाया
मगर
रात
पहरा
रहा
ज़ख़्म
भरने
लगे
दाग़
गहरा
रहा
इस
सफ़र
में
किसे
हम
सेफ़र
हम
कहें
सब
गए
छोड़
कर
वक़्त
ठहरा
रहा
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Sandeep Rajput
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कहती
रहती
हैं
मुझ
सेे
कहानी
ये
यादें
क्यूँ
छुपाकर
रखी
ये
निशानी
ये
यादें
करते
आए
हैं
मुझको
ये
कमज़ोर
अब
तक
खा
न
जाए
मेरी
ये
जवानी
ये
यादें
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Sandeep Rajput
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