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Shruti chhaya
mohabbat men koi jhagda nahin hai
mohabbat men koi jhagda nahin hai | मुहब्ब्त में कोई झगड़ा नहीं है
- Shruti chhaya
मुहब्ब्त
में
कोई
झगड़ा
नहीं
है
तेरा
बर्ताव
पर
अच्छा
नहीं
है
किसी
दिन
जान
ले
लूँगी
तुम्हारी
अभी
ग़ुस्सा
मेरा
देखा
नहीं
है
रखा
है
सर
तेरे
क़दमों
में
हमने
जिसे
जाना
हो
वो
झुकता
नहीं
है
तेरा
मन
है
तो
दुनिया
खोज
ले
तू
मेरा
दावा
कोई
मुझ
सेा
नहीं
है
मैं
अपने
हाल
में
उतनी
ही
ख़ुश
हूँ
कि
जितना
तू
है
पर
लगता
नहीं
है
- Shruti chhaya
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चेहरा
धुँदला
सा
था
और
सुनहरे
झुमके
थे
बादल
ने
कानों
में
चाँद
के
टुकड़े
पहने
थे
इक
दूजे
को
खोने
से
हम
इतना
डरते
थे
ग़ुस्सा
भी
होते
तो
बातें
करते
रहते
थे
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Vikram Gaur Vairagi
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मुझ
सेे
जो
मुस्कुरा
के
मिला
हो
गया
उदास
ताज़ा
हवा
की
खिड़कियों
को
जंग
लग
गई
Siddharth Saaz
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लोग
कहते
हैं
कि
तू
अब
भी
ख़फ़ा
है
मुझ
से
तेरी
आँखों
ने
तो
कुछ
और
कहा
है
मुझ
से
Jaan Nisar Akhtar
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यार
इस
में
तो
मज़ा
है
ही
नहीं
कोई
भी
हम
सेे
ख़फ़ा
है
ही
नहीं
इश्क़
ही
इश्क़
है
महसूस
करो
और
कुछ
इसके
सिवा
है
ही
नहीं
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Madhyam Saxena
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मना
भी
लूँगा
गले
भी
लगाऊँगा
मैं
'अली'
अभी
तो
देख
रहा
हूँ
उसे
ख़फ़ा
कर
के
Ali Zaryoun
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हम
तो
कुछ
देर
हँस
भी
लेते
हैं
दिल
हमेशा
उदास
रहता
है
Bashir Badr
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तुम
को
आता
है
प्यार
पर
ग़ुस्सा
मुझ
को
ग़ुस्से
पे
प्यार
आता
है
Ameer Minai
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गए
ज़माने
की
चाप
जिन
को
समझ
रहे
हो
वो
आने
वाले
उदास
लम्हों
की
सिसकियाँ
हैं
Aanis Moin
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देर
से
आने
पर
वो
ख़फ़ा
था
आख़िर
मान
गया
आज
मैं
अपने
बाप
से
मिलने
क़ब्रिस्तान
गया
Afzal Khan
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ख़्वाब
के
आस
पास
रह
रह
कर
थक
गया
हूँ
उदास
रह
रह
कर
Shahbaz Rizvi
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किसे
सूरज
किसे
चंदा
कहें
हम
किसे
अब
आँख
का
तारा
कहें
हम
तेरे
दर
से
भी
हम
प्यासे
ही
लौटे
बता
कैसे
तुझे
दरिया
कहें
हम
वफ़ा
की
आबरू
रखनी
है
हमको
तो
तुझको
किसलिए
झूटा
कहें
हम
तुम्हीं
से
थी
महज़
दुनिया
हमारी
तुम्हीं
बोलो
किसे
दुनिया
कहें
हम
हजारों
ज़ख़्म
दिल
से
आ
लगें
हैं
किसे
आला
किसे
अच्छा
कहें
हम
मुहब्बत
ने
हमारी
जान
ली
है
इसे
अब
ज़हर
की
पुड़िया
कहें
हम
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Shruti chhaya
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हाल
तुम्हारा
किस
से
जाकर
पूछूँ
मैं
हम
दोनों
के
बीच
में
कोई
दोस्त
नहीं
Shruti chhaya
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जिसको
छोड़ा
छोड़
दिया
अपनी
ज़िद
के
पक्के
हम
दरियाओं
की
बात
न
कर
सहराओं
में
डूबे
हम
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Shruti chhaya
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करेगी
ख़ुद-कुशी
आख़िर
मुहब्बत
अना
से
अब
गई
है
घिर
मुहब्बत
बदन
तक
का
सफ़र
भाता
है
इसको
कुछ
इस
हद
तक
गई
है
गिर
मुहब्बत
जिसे
चाहे
उसी
को
पूजती
है
है
कितनी
देख
लो
काफ़िर
मुहब्ब्त
पुराने
ज़ख़्म
भी
अब
तक
नये
हैं
मगर
दिल
चाहता
है
फिर
मुहब्बत
कहीं
हम
दोस्ती
भी
खो
न
बैठें
सो
करते
ही
नहीं
ज़ाहिर
मुहब्बत
किसी
के
वास्ते
है
अमृता
तो
किसी
के
वास्ते
साहिर
मुहब्बत
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Shruti chhaya
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पूरी
उम्र
गुज़ारी
हमने
एक
खिलौने
की
ज़िद
पर
यानी
पूरी
उम्र
ही
हमने
दिल
को
बच्चा
रक्खा
है
Shruti chhaya
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