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Shobhit Dixit
mere dukh ko mujhse zyaada kaun samjha
mere dukh ko mujhse zyaada kaun samjha | मेरे दुख को मुझ सेे ज़्यादा कौन समझा
- Shobhit Dixit
मेरे
दुख
को
मुझ
सेे
ज़्यादा
कौन
समझा
मेरा
दुख
भी
बिलकुल
मुझ-सा
हो
रहा
था
- Shobhit Dixit
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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सुखा
ली
सबने
ही
आँखें
हवा
ए
ज़िन्दगी
से
यहाँ
अब
भी
वही
रोना
रुलाना
चल
रहा
है
Farhat Ehsaas
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ईद
ख़ुशियों
का
दिन
सही
लेकिन
इक
उदासी
भी
साथ
लाती
है
ज़ख़्म
उभरते
हैं
जाने
कब
कब
के
जाने
किस
किस
की
याद
आती
है
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Farhat Ehsaas
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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पेड़
को
काटने
वाले
क्या
जाने
दुख
हम
गले
लग
नहीं
सकते
दीवार
से
Neeraj Neer
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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दूजों
का
दुख
समझने
को
बे
हद
ज़रूरी
है
थोड़ी
सही
प
दिल
में
अज़ीयत
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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उम्मीद
रहे
बाकी,
बाकी
सब
चला
जाए
कोई
छला
हुआ
आख़िर
कितना
छला
जाए
माचिस
तीली
चिंगारी
से
कोई
राबता
नहीं
कोई
उसके
हाथ
पकड़े
और
मुझे
जला
जाए
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Shobhit Dixit
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हमने
होकर
देख
लिया
है
तू
भी
देख
चुनिंदा
होकर
आँसू
से
भीगी
आँखों
का
इक
बारी
बाशिंदा
होकर
चैन
नहीं
मिल
पाता
है
चाहे
जितना
भी
ऊँचा
उड़
लो
बात
न
मानो
मेरी
तो
फिर
देखो
ख़ुद
से
परिंदा
होकर
जैसा
फ़िल्मों
में
होता
है
बचपन
से
वैसी
ख़्वाहिश
है
मुझको
भी
मिल
जाओ
पापा
तुम
वैसे
ही
ज़िंदा
होकर
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Shobhit Dixit
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हम
तो
जाकर
दहलीज़ों
पर
बैठे
हैं
जब
देखा
है
दरवाज़ों
पर
ताले
हैं
Shobhit Dixit
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पहले
तो
इश्क़
करना
आना
भी
चाहिए
फिर
बात
बनाने
का
बहाना
भी
चाहिए
Shobhit Dixit
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हँसकर
के
कितना
रोते
हैं
लड़के
भी
लड़के
होते
हैं
Shobhit Dixit
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