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Shivam chaubey
aao ki doosri kisi kashtii ka rukh karen
aao ki doosri kisi kashtii ka rukh karen | आओ कि दूसरी किसी कश्ती का रुख़ करें
- Shivam chaubey
आओ
कि
दूसरी
किसी
कश्ती
का
रुख़
करें
इस
नाव
में
कुछ
भी
नहीं
आज़ार
के
सिवा
- Shivam chaubey
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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तमाम
जिस्म
को
आँखें
बना
के
राह
तको
तमाम
खेल
मुहब्बत
में
इंतिज़ार
का
है
Munawwar Rana
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ये
वो
क़बीला
है
जो
हुस्न
को
ख़ुदा
माने
यहाँ
पे
कौन
तेरी
बात
का
बुरा
माने
इशारा
कर
दिया
है
आपकी
तरफ़
मैंने
ये
बच्चे
पूछ
रहे
थे
कि
बे-वफ़ा
माने
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Kushal Dauneria
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हम
तोहफ़े
में
घड़ियाँ
तो
दे
देते
हैं
एक
दूजे
को
वक़्त
नहीं
दे
पाते
हैं
आँखें
ब्लैक
एंड
व्हाइट
हैं
तो
फिर
इन
में
रंग
बिरंगे
ख़्वाब
कहाँ
से
आते
हैं?
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Fareeha Naqvi
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हाए
उसके
हाथ
पीले
होने
का
ग़म
इतना
रोए
हैं
कि
आँखें
लाल
कर
ली
Harsh saxena
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लाखों
सद
में
ढेरों
ग़म
फिर
भी
नहीं
हैं
आँखें
नम
इक
मुद्दत
से
रोए
नहीं
क्या
पत्थर
के
हो
गए
हम
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Azm Shakri
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बरस
रही
है
आँखें
हैं
ये
इनको
बादल
मत
कहना
मौत
हुई
है
दिल
की
मेरे
उसको
घाइल
मत
कहना
जीवन
भर
वो
साथ
रहेगा
प्यार
करेगा
बस
तुमको
मुझको
पागल
कह
देती
थी
उसको
पागल
मत
कहना
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Tanoj Dadhich
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मैं
हर
शख़्स
के
चेहरे
को
बस
इस
उम्मीद
से
तकता
हूँ
शायद
से
मुझको
दो
आँखें
तेरे
जैसी
दिख
जाएँ
Siddharth Saaz
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आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
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Bhaskar Shukla
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मैं
खोया
खोया
सा
तेरी
छत
की
जानिब
देख
रहा
हूँ
गीले
कपड़े
सूख
रहे
हैं,
सूखी
आँखें
भीग
रही
हैं
Harman Dinesh
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यार
हमारे
दिल
की
जलन
ज़ियादा
है
तुम
सिगरेट
पे
यूँँ
ही
लेक्चर
देती
हो
Shivam chaubey
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एक
समुंदर
की
आँख
नीली
है
एक
बादल
का
रंग
काला
है
क्या
उदासी
है
उस
मुसव्विर
की
कितनी
शिद्दत
से
रंग
डाला
है
वो
अपने
सब
दुखों
पे
हँसता
है
मैं
अपनी
हर
ख़ुशी
में
रोता
हूँ
उसके
सीने
पे
फूल
खिलते
हैं
मेरी
आँखों
में
कैसा
छाला
है
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Shivam chaubey
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उठा
कर
रख
दिए
हमने
जतन
से
उतारे
हैं
जो
दुख
अपने
बदन
से
नहीं
मिलते
हैं
मेरे
लोग
वैसे
मिले
सूरज-मुखी
जैसे
किरन
से
मुझे
गमलों
में
रखकर
क्या
करोगे
मेरा
क्या
राब्ता
है
इस
चमन
से
मैं
ख़ुश
तो
हो
नहीं
पाया
मगर
सुन
तेरे
कानों
के
झुमकों
की
खनन
से
सफ़र
की
ओट
लेकर
के
खड़े
हैं
क़सम
से
थक
गए
हैं
हम
थकन
से
किसी
इम्कान
पर
आकर
मिलेंगे
कभी
लौटे
जो
हम
इस
राह
ए
रन
से
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Shivam chaubey
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चुप
भी
रहना
है
एक
फ़न
आख़िर
क्या
ज़रूरत
है
बात
की
जाए
Shivam chaubey
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एक
क़िस्सा
जो
मुकम्मल
होते
होते
रह
गया
एक
लड़की
ने
किताब
आधी
पढ़ी
और
छोड़
दी
Shivam chaubey
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