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SHIV SAFAR
dharti ke darindo ki sabha chaunk gaii thii
dharti ke darindo ki sabha chaunk gaii thii | धरती के दरिंदो की सभा चौंक गई थी
- SHIV SAFAR
धरती
के
दरिंदो
की
सभा
चौंक
गई
थी
इंसान
को
इंसान
पुकारा
किसी
ने
जब
- SHIV SAFAR
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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लोग
टूट
जाते
हैं
एक
घर
बनाने
में
तुम
तरस
नहीं
खाते
बस्तियाँ
जलाने
में
Bashir Badr
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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बहुत
से
लोग
हैं
तस्वीर
में
अच्छे
बहुत
अच्छे
तेरे
चेहरे
पे
ही
मेरी
नज़र
हरदम
ठहरती
है
Umesh Maurya
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कैसे
मंज़र
सामने
आने
लगे
हैं
गाते
गाते
लोग
चिल्लाने
लगे
हैं
Dushyant Kumar
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उसको
जो
कुछ
भी
कहूँ
अच्छा
बुरा
कुछ
न
करे
यार
मेरा
है
मगर
काम
मेरा
कुछ
न
करे
दूसरी
बार
भी
पड़
जाए
अगर
कुछ
करना
आदमी
पहली
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
न
करे
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Abid Malik
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हम
तो
सुनते
थे
कि
मिल
जाते
हैं
बिछड़े
हुए
लोग
तू
जो
बिछड़ा
है
तो
क्या
वक़्त
ने
गर्दिश
नहीं
की
Ambreen Haseeb Ambar
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गरचे
अहल-ए-शराब
हैं
हम
लोग
ये
न
समझो
ख़राब
हैं
हम
लोग
Jigar Moradabadi
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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सवेरे
से
ले
बैठा
हूँ
गुलाल
अपने
मैं
हाथों
में
न
ये
बेरंग
हो
जाए
तुम
अपना
गाल
इधर
कर
दो
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कुछ
कर
गुज़रने
का
न
जो
तुझ
में
जुनून
है
तो
हो
न
हो
रगों
में
तेरे
गंदा
ख़ून
है
ये
शायरों
की
ज़िन्दगी
जीने
से
तो
भला
कुत्ते
की
मौत
मरने
में
ज़्यादा
सुकून
है
क्यूँ
हो
रही
है
बारिशें
आँखों
से
जब
कि
ये
बरसात
का
न
वक़्त
न
ही
माह-ए-जून
है
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पढ़ाई
में
ये
मन
फिर
क्या
लगेगा
तेरा
दिल
जब
किसी
से
जा
लगेगा
मिलो
तो
लेके
डेरीमिल्क
जाना
यक़ीं
मानो
उसे
अच्छा
लगेगा
अगर
बेकारी
के
हों
दिन
तुम्हारे
तो
घर
का
शहद
भी
खट्टा
लगेगा
मैं
याद
आऊँ
तो
शीशा
तोड़
देना
वो
बिल्कुल
हू-ब-हू
मुझ
सा
लगेगा
पिता
से
क़द
बड़ा
हो
जाए
लेकिन
हमेशा
माँ
को
तू
बच्चा
लगेगा
वो
लड़की
है
जो
हँस
के
बोल
देगी
तो
उसका
झूठ
भी
सच्चा
लगेगा
मगर
हम
लड़के
सीना
चीर
भी
दें
तो
सबको
ख़ून
भी
झूठा
लगेगा
ख़ुदा
ख़ाली
नहीं
है
मस्ज़िदों
में
दु'आ
करना
है
तो
पैसा
लगेगा
अगर
बे
को
वफ़ा
के
आगे
रख
दूँ
मेरा
विश्वास
है
तुझ
सा
लगेगा
मैं
तेरा
कुछ
नहीं
ये
कहने
वाली
तेरा
भाई
मेरा
साला
लगेगा
करा
दूँगा
तेरा
रीचार्ज़
भी
मैं
मगर
बदले
में
इक
बोसा
लगेगा
सिवा
मेरे
कोई
भी
साथ
तेरे
मेरी
मानो
बहुत
भद्दा
लगेगा
तेरे
कहने
पे
मर
जाऊँ
मैं
लेकिन
सफ़र
सोता
हुआ
कैसा
लगेगा
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साथ
इक
दूजे
के
हम
होते
जनाब
पास
फिर
इतने
न
ग़म
होते
जनाब
मुझ
सेे
ही
होती
समुंदर
में
नमी
दुख
जो
रो
लेने
से
कम
होते
जनाब
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पत्थर
के
इस
जहाँ
में
थी
रोने
लगी
सभा
जब
आदमी
ने
आदमी
को
आदमी
कहा
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