kaanpate rote kati hai aur to kuchh bhi nahin | काँपते रोते कटी है और तो कुछ भी नहीं

  - SHIV SAFAR
काँपतेरोतेकटीहैऔरतोकुछभीनहीं
रातथीसुब्हअबहुईहैऔरतोकुछभीनहीं
रूहसेथाइश्क़तोफिरक्याशिकायतवोअगर
ग़ैरबिस्तरपरमिलीहैऔरतोकुछभीनहीं
वैसेकोईग़मनहींहैबिनतेरेजान-ए-जाँ
ज़िंदगीग़मलगरहीहैऔरतोकुछभीनहीं
क्यूँँबहाऊँअश्कमैंअबकौनसावोमरगई
ग़ैरकीबसहोगईहैऔरतोकुछभीनहीं
क्यूँँकरूँँग़मक्याहुआऐसाकिजोहोनाथा
जानेवालीजाचुकीहैऔरतोकुछभीनहीं
  - SHIV SAFAR
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