jab se hai sabki tan pe basaarat tangi hui | जब से है सबकी तन पे बसारत टँगी हुई

  - SHIV SAFAR
जबसेहैसबकीतनपेबसारतटँगीहुई
बिकनेलगीहैसड़कोंपेइस्मतटँगीहुई
क़ुव्वतअगरहोतुझ
मेंतोतूभीउतारला
ज़िल्लतकेआसमाँपेहैशोहरतटंँगीहुई
घरआनेपरभीचैन-ओ-सुकूँमिलनहींरहा
दफ़्तरमेंभूलआयामैंराहतटँगीहुई
तूनेउतारफेंकाक़बासामुझेमगर
दिलमेंहैतेरीआजभीसूरतटंँगीहुई
दोदोस्तीकेहाथोंकेमिलनेकीआसमें
हैसरहदोंपेआजभीनफ़रतटंँगीहुई
दोमुल्कोंकीलड़ाईमेंअक्सरहीदेखाहै
मैंनेकटीलेतारोंपेचाहतटँगीहुई
दोजा-ए-अम्नमुल्कोंकीचाहतकीज़ुल्ममें
घाटीमेंलाशबनकेहैजन्नतटंँगीहुई
बेटीकेरातदेरसेआनेपेआजभी
रहतीहलक़मेंबापकीइज़्ज़तटंँगीहुई
ख़ुदकोजोजातिधर्मकारखवालाकहतेहैं
घरउनकेसूलीपरहैमुहब्बतटँगीहुई
  - SHIV SAFAR
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