ik kabootar ke gutargoo sa fasana meraa | इक कबूतर के गुटरगूँ सा फ़साना मेरा

  - SHIV SAFAR
इककबूतरकेगुटरगूँसाफ़सानामेरा
मेरीआवाज़से,हैहालबताक्यामेरा
सिर्फ़सूरतहीभुलानेसेग़मकमहोगा
चाहताहूॅंमैंभुलादूॅंकेकोईथामेरा
अबतोबसज़िंदाहीरहनाहैदिखावेकेलिए
होगयाख़त्मतेरेजातेज़मानामेरा
मेरीबर्बादियोंकामुझकोभीथाअंदाज़ा
तेरेहाथोंमेंमुक़द्दरजोलिखाथामेरा
दफ़्तर–ए–ज़िंदगीमेंऐसेउलझबैठाहूॅं
अबतोकमहोगयाघरअपनेहीजानामेरा
यादतुमकोभीजबआएगातोतुमरोओगी
वोहॅंसानावोचिढ़ानावोमनानामेरा
मेरेरोनेकाहैमतलबकिमुझेग़मचहिए
कोईसमझाहीनहींइतनाइशारामेरा
इतनीआसानीसेमैंतुझकोभुलाऊॅंगानहीं
मुझकोअफ़सोसरहेगातूकभीथामेरा
जैसेकोईमाँतड़पउठतीहैबच्चेकेबिना
शा'इरीसेभीकुछऐसाहीहैरिश्तामेरा
मुझसेेतुमपूछतेहोकौन‘सफ़र’हैआख़िर
तुमकोमालूमनहींतुमभीहोहिस्सामेरा
  - SHIV SAFAR
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