haath apna jaate jaate kuchh yuñ jhuma raha tha | हाथ अपना जाते जाते कुछ यूँँ झुमा रहा था

  - SHIV SAFAR
हाथअपनाजातेजातेकुछयूँँझुमारहाथा
जैसेसदाकीख़ातिरवोदूरजारहाथा
होतेहीसुब्हमुझसेेमाँपूछनेलगीहै
कलख़्वाबमेंतूरोकेकिसकोबुलारहाथा
पहलीदफ़ावोअपनेमिलनेपेसोचताहूँ
क्यामुझकोहोगयाथाक्यूँँमुस्कुरारहाथा
हमदोनोंकेमुकम्मलमंसूबेहोपाए
मैंप्यारकररहाथावोआज़मारहाथा
मैंजानताहूँतुमकोतुमदूधकेधुलेहो
वोमैंथाजोख़ुदअपनेदिलकोदुखारहाथा
अबमानजाताहूँमैंमाज़ीकोयादकरके
वर्नाकिसीसेमैंभीबरसोंख़फ़ारहाथा
अबथकगयाहूँसचहैलेकिनहाँसचहैयेभी
जीजानमैंलगाकेउसकोभुलारहाथा
कुछचारसालसेयेसूरतहैबद्दुआसी
वर्नाकिसीकेदिलकीमैंभीदु'आरहाथा
कलशबमुशा'इरेमेंरोनेलगा‘सफ़र’क्यूँँ
जोभीहोवजहहमकोतोलुत्फ़रहाथा
  - SHIV SAFAR
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