gham ko mere sau guna karte hain tukde kaanch ke | ग़म को मेरे सौ गुना करते हैं टुकड़े काँच के

  - SHIV SAFAR
ग़मकोमेरेसौगुनाकरतेहैंटुकड़ेकाँचके
मैंनेयूँँदिलमेंसजारक्खेहैंटुकड़ेकाँचके
आइनेसीएकलड़कीख़्वाबमेंआतीहैजब
सुब्हमेरीआँखसेझड़तेहैंटुकड़ेकाँचके
जिनकीमुझसेेहैसियतआँखेंमिलानेकीथी
पाँवकेनीचेमेरेबनकेहैंटुकड़ेकाँचके
लौटजातीहैंमेरीचौखटसेहीतन्हाईयाँ
साथकमरेमेंमेरेरहतेहैंटुकड़ेकाँचके
फिरमुहब्बतगरहुईतोटूटकरमतचाहना
ख़ूँकेबदलेदिलसेबहसकतेहैंटुकड़ेकाँचके
भूलबैठाहूँकहींपेलिखकेनंबरअपनोंका
पूछनाथायेकिअबकैसेहैंटुकड़ेकाँचके
एकदिनहोताहैअपनीअसलियतसेसामना
लोगफिरग़ुस्सेमेंकरदेतेहैंटुकड़ेकाँचके
हँसनेकीज़हमतकरनाटूटनेपरतुममेरे
मुझपेहँसनेकेलिएबैठेहैंटुकड़ेकाँचके
चलनहींपाओगेमेरेसाथतुमगुल-बदन
इस‘सफ़र’मेंजा-ब-जाबिखरेहैंटुकड़ेकाँचके
  - SHIV SAFAR
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy