dahal jaata hai dil kyun aaine se | दहल जाता है दिल क्यूँँ आइने से

  - SHIV SAFAR
दहलजाताहैदिलक्यूँँआइनेसे
कभीपूछोकिसीबहरूपिएसे
हुआइंसाफ़गरइसफ़ैसलेसे
तोफिरक्यूँँआहउट्ठीकटघरेसे
किताबोंसेनहींजोभूलजाऊँ
जोकुछसीखाहैसीखातजरबेसे
समुंदररोकपाएगाकहाँतक
किसीटूटेहुएकोडूबनेसे
निशाँहैप्यारकायासतवतोंका
येकैसीबूहैआतीमक़बरेसे
अज़ीज़ोंसेमिलाधोकातोजाना
खिसकतीहैज़मींपैरोंतलेसे
हमेशादौड़करमुमकिननहींहै
किमिलतीभीहैमंज़िलरेंगनेसे
शिकायतक्याकरेंअबफ़ासलोंकी
हमींकहनेगएथेतीसरेसे
किसीकेपाँवयालबतुमबताओ
येरूखेहोंठहैंक्याचूमनेसे
सफ़रकोईनयाथोड़ीहैयारो
येग़ममुझ
मेंहैसनचौरान्वेसे
  - SHIV SAFAR
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