ab zaraa sii bhi khushi pe yaar dukhne lagte hain | अब ज़रा सी भी ख़ुशी पे यार दुखने लगते हैं

  - SHIV SAFAR
अबज़रासीभीख़ुशीपेयारदुखनेलगतेहैं
मुस्कुरादेनेसेभीरुख़्सारदुखनेलगतेहैं
राह-ए-उलफ़तमेंमिलेहरआबलोंकोसहगया
क्यादुखेंगेज़ख़्मअबख़ुदख़ारदुखनेलगतेहैं
चाहताहूँमैंकितेरानामहरमिसरेमेंहो
ज़िक्रसेतेरेमगरअश'आरदुखनेलगतेहैं
जीमेंआताहैकितुझपेछेड़हूँकोईग़ज़ल
यादकुछआताहैदिलकेतारदुखनेलगतेहैं
तुमहीहोजिसकोतरसआतानहींवर्नातोअब
मेरेग़मसेबातिन-ए-अग़्यारदुखनेलगतेहैं
उसकोलगताहैकोईशिकवानहींमुझकोमगर
कुछकहसकनेसेलबहरबारदुखनेलगतेहैं
बाततोहोगीनहींपरदेखनेजायाकरो
वर्नाअपनीक़ब्रमेंहम-यारदुखनेलगतेहैं
  - SHIV SAFAR
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