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shaan manral
maahir hai vo chhipaane men har waardaat ko
maahir hai vo chhipaane men har waardaat ko | माहिर है वो छिपाने में हर वारदात को
- shaan manral
माहिर
है
वो
छिपाने
में
हर
वारदात
को
ढा
के
सितम
कभी
वो
सितमगर
नहीं
हुआ
- shaan manral
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सारी
दुनिया
के
ग़म
हमारे
हैं
और
सितम
ये
कि
हम
तुम्हारे
हैं
Jaun Elia
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ख़ून
से
सींची
है
मैं
ने
जो
ज़मीं
मर
मर
के
वो
ज़मीं
एक
सितम-गर
ने
कहा
उस
की
है
Javed Akhtar
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ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
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Jaun Elia
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जाने
क्या
क्या
ज़ुल्म
परिंदे
देख
के
आते
हैं
शाम
ढले
पेड़ों
पर
मर्सिया-ख़्वानी
होती
है
Afzal Khan
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क्या
सितम
है
कि
अब
तिरी
सूरत
ग़ौर
करने
पे
याद
आती
है
Jaun Elia
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टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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उम्र
के
आख़िरी
मक़ाम
में
हम
मिल
भी
जाए
तो
क्या
ख़ुशी
होगी
क्या
सितम
तुम
को
देखने
के
लिए
हम
को
दुनिया
भी
देखनी
होगी
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Vikram Sharma
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जाने
क्या
क्या
ज़ुल्म
परिंदे
देख
के
आते
हैं
शाम
ढले
पेड़ों
पर
मर्सिया-ख़्वानी
होती
है
Afzal Khan
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मेरी
सिफ़ात
पहले
से
सहमी
हुई
सी
थी
छोड़ो
कभी
किसी
ने
सताया
नहीं
मुझे
shaan manral
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उस
पे
यक़ीं
न
करते
हुए
भी
करेंगे
सब
मासूम
शक्ल
से
जो
कहानी
बताएगी
shaan manral
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दर्द
से
दामन
छुड़ाना
आ
गया
या'नी
फिर
से
मुस्कुराना
आ
गया
आप
हासिल
हैं
जिसे
ऐ
दिल-नशीं
हाथ
में
उस
के
ख़ज़ाना
आ
गया
आप
के
तेवर
बदल
ही
जाएँगे
चंद
पैसे
जो
कमाना
आ
गया
आप
तो
मासूम
लगते
हैं
बहुत
कैसे
फिर
दिल
ये
दुखाना
आ
गया
देखिए
मेरा
सफ़र
तो
ख़त्म
है
अब
फ़क़त
मेरा
ठिकाना
आ
गया
बाप
के
आराम
के
दिन
आ
गए
बेटे
को
आख़िर
कमाना
आ
गया
आपका
आँचल
मिला
है
धूप
में
आज
सर
पे
शामियाना
आ
गया
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shaan manral
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इश्क़
हुआ
है
क्या
तुझ
को
भी
तेरा
जो
होगा
सो
होगा
shaan manral
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है
इस
हसीन
शौक़
में
लज़्ज़त
छुपी
हुई
बहला
रहे
हैं
ख़ुद
को
मियाँ
शा'इरी
से
हम
shaan manral
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