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shaan manral
baap ke aaraam ke din aa ga.e
baap ke aaraam ke din aa ga.e | बाप के आराम के दिन आ गए
- shaan manral
बाप
के
आराम
के
दिन
आ
गए
बेटे
को
आख़िर
कमाना
आ
गया
- shaan manral
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लड़कियों
के
दुख
अजब
होते
हैं
सुख
उस
से
अजीब
हँस
रही
हैं
और
काजल
भीगता
है
साथ
साथ
Parveen Shakir
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हम
रातों
को
उठ
उठ
के
जिनके
लिए
रोते
हैं
वो
ग़ैर
की
बाँहों
में
आराम
से
सोते
हैं
Hasrat Jaipuri
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यूँँ
देखिए
तो
आँधी
में
बस
इक
शजर
गया
लेकिन
न
जाने
कितने
परिंदों
का
घर
गया
जैसे
ग़लत
पते
पे
चला
आए
कोई
शख़्स
सुख
ऐसे
मेरे
दर
पे
रुका
और
गुज़र
गया
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Rajesh Reddy
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ईद
के
रोज़
यही
अपनी
दु'आ
है
रब
से
मुल्क
में
अमन
का,
उलफ़त
का
बसेरा
हो
जाए
हर
परेशानी
से
हर
शख़्स
को
मिल
जाए
नजात
इस
सियह
रात
का
बस
जल्द
सवेरा
हो
जाए
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Zaki Azmi
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जो
चराग़
सारे
बुझा
चुके
उन्हें
इंतिज़ार
कहाँ
रहा
ये
सुकूँ
का
दौर-ए-शदीद
है
कोई
बे-क़रार
कहाँ
रहा
Ada Jafarey
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गुज़िश्ता
साल
कोई
मस्लहत
रही
होगी
गुज़िश्ता
साल
के
सुख
अब
के
साल
दे
मौला
Liyaqat Ali Aasim
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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हुस्न
उनका
सादगी
में
कुछ
अलग
महका
किया
मैंने
धड़कन
से
कहा
धड़को
मगर
आराम
से
Ishq Allahabadi
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दिल
की
चोटों
ने
कभी
चैन
से
रहने
न
दिया
जब
चली
सर्द
हवा
मैं
ने
तुझे
याद
किया
Josh Malihabadi
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सुकून
क़ल्ब
को
जिस
से
मिल
जाए
'ताबाँ'
ग़ज़ल
कोई
ऐसी
सुना
दीजिएगा
Anwar Taban
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अभी
हम
तुम
दोबारा
मिल
के
बोलो
क्या
करेंगे
वो
पहले
से
न
तुम
तुम
हो
न
हम
हम
है
ज़रा
भी
shaan manral
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हर
रात
इक
चराग़
जलाना
पड़ा
मुझे
ये
रस्म-
ए-
इंतिज़ार
निभाना
पड़ा
मुझे
shaan manral
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जगह
ख़ाली
नहीं
रहती
कभी
भी
तेरे
जाते
ही
कोई
आ
रहा
था
shaan manral
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जी
चाहता
है
एक
यही
काम
करने
को
मैं
अपने
दिल
का
हाल
ग़ज़ल
में
समेट
लूँ
वैसे
तुम्हारे
बारे
में
क्या
सोचता
हूँ
मैं
कह
दो
तो
वो
ख़याल
ग़ज़ल
में
समेट
लूँ
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shaan manral
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बात
से
बात
बनेगी
तू
कभी
बात
तो
कर
आ
ज़रा
पास
मिरे
यार
मुलाक़ात
तो
कर
पूछ
तू
भी
तो
कभी
हाल
हमारे
दिल
का
हाल
से
हाल
मिलाने
की
शुरूआत
तो
कर
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shaan manral
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