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Manoj Sharma "Chandan"
main khulkar muskurana chahta hooñ
main khulkar muskurana chahta hooñ | मैं खुलकर मुस्कुराना चाहता हूँ
- Manoj Sharma "Chandan"
मैं
खुलकर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
किसी
का
ग़म
भुलाना
चाहता
हूँ
मेरा
मक़सद
तुम्हें
पाना
नहीं
है
मगर
माँ
से
मिलाना
चाहता
हूँ
- Manoj Sharma "Chandan"
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हाए
उसके
हाथ
पीले
होने
का
ग़म
इतना
रोए
हैं
कि
आँखें
लाल
कर
ली
Harsh saxena
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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ये
ग़म
हमको
पत्थर
कर
देगा
इक
दिन
कोई
आ
कर
हमें
रुलाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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मशहूर
भी
हैं
बदनाम
भी
हैं
ख़ुशियों
के
नए
पैग़ाम
भी
हैं
कुछ
ग़म
के
बड़े
इनाम
भी
हैं
पढ़िए
तो
कहानी
काम
की
है
Anjum Barabankvi
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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आन
के
इस
बीमार
को
देखे
तुझको
भी
तौफ़ीक़
हुई
लब
पर
उसके
नाम
था
तेरा
जब
भी
दर्द
शदीद
हुआ
Ibn E Insha
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हम
ऐसे
लोग
भी
जाने
कहाँ
से
आते
हैं
ख़ुशी
में
रोते
हैं
जो
ग़म
में
मुस्कुराते
हैं
हमारा
साथ
भला
कब
तलक
निभाते
आप
कभी
कभी
तो
हमीं
ख़ुद
से
ऊब
जाते
हैं
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Mohit Dixit
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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इस
क़दर
जज़्ब
हो
गए
दोनों
दर्द
खेंचूँ
तो
दिल
निकल
आए
Abbas Qamar
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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दर्द
ग़म
तकलीफ़
सब
कुछ
ही
छुपाना
पड़ता
है
कोई
पूछे
कैसे
हो
तो
मुस्कुराना
पड़ता
है
हाथ
उस
का
थामकर
अपना
बना
लूँ
मैं
मगर
बस
हमारे
बीच
में
'चंदन'
ज़माना
पड़ता
है
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Manoj Sharma "Chandan"
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मुझको
तो
आशिक़ी
नहीं
आती
हाँ
मुझे
ख़ुद-कुशी
नहीं
आती
यूँँ
तो
आती
है
याद
माज़ी
की
और
तू
है
कभी
नहीं
आती
कैसे
आते
हैं
ख़्वाब
यूँँ
तुमको
हमको
तो
नींद
भी
नहीं
आती
जी
लो
जी
भर
के
ज़िन्दगी
यारों
लौटकर
ज़िन्दगी
नहीं
आती
इक
इमारत
ने
रोक
रक्खा
है
रौशनी
शम्स
की
नहीं
आती
कैसे
लिक्खोगे
तुम
ग़ज़ल
'चंदन'
गर
तुम्हें
शा'इरी
नहीं
आती
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Manoj Sharma "Chandan"
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अब
मैं
कैसे
नई
ग़ज़ल
लिक्खूँ
एक
अर्सा
हुआ
तुम्हें
देखे
Manoj Sharma "Chandan"
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तुझे
यक़ीन
न
होगा
मैं
इतना
चाहूँगा
तेरे
बग़ैर
है
जीना
तो
क्या
जी
पाऊँगा
क़लम
उठाई
है
मैंने
बहुत
दिनों
के
बाद
अगर
लिखूँगा
तो
ख़ुद
को
मैं
मार
डालूँगा
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Manoj Sharma "Chandan"
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बदल
कर
रख
दी
उसने
ज़िन्दगी
मेरी
के
हालत
हो
गई
है
जॉन
सी
मेरी
मैं
उस
दिन
मर
गया
जिस
दिन
कहा
उसने
भुला
दो
मुझ
को
गर
चाहो
ख़ुशी
मेरी
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Manoj Sharma "Chandan"
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