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Shams Amiruddin
mohabbat jo samajhte hain
mohabbat jo samajhte hain | मोहब्बत जो समझते हैं
- Shams Amiruddin
मोहब्बत
जो
समझते
हैं
वहीं
हम
को
समझते
हैं
फ़क़त
अब
हम
हक़ीकत
भी
यूँँ
ख़्वाबों
को
समझते
हैं
- Shams Amiruddin
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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शहर-वालों
की
मोहब्बत
का
मैं
क़ायल
हूँ
मगर
मैंने
जिस
हाथ
को
चूमा
वही
ख़ंजर
निकला
Ahmad Faraz
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इश्क़
पर
ज़ोर
नहीं
है
ये
वो
आतिश
'ग़ालिब'
कि
लगाए
न
लगे
और
बुझाए
न
बने
Mirza Ghalib
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याद
रखना
ही
मोहब्बत
में
नहीं
है
सब
कुछ
भूल
जाना
भी
बड़ी
बात
हुआ
करती
है
Jamal Ehsani
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है,
यह
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वा'दा
फ़रामोश
नहीं
है
कोई,
दिल
तलबग़ार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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नई
दुनिया
बनाऊँगा
मगर
मैं
अपनी
दुनिया
का
ख़ुदा
भी
इश्क़
में
खोया
हुआ
लड़का
बनाऊँगा
Satya Prakash Soni
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सिर्फ़
ज़िंदा
रहने
को
ज़िंदगी
नहीं
कहते
कुछ
ग़म-ए-मोहब्बत
हो
कुछ
ग़म-ए-जहाँ
यारो
Himayat Ali Shayar
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सोच
कर
पाँव
डालना
इस
में
इश्क़
दरिया
नहीं
है
दलदल
है
Renu Nayyar
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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ये
मोहब्बत
के
महल
तामीर
करना
छोड़
दे
मैं
भी
शहज़ादा
नहीं
हूँ
तू
भी
शहज़ादी
नहीं
Afzal Khan
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खेल
सारा
ही
फ़क़त
क़िस्मत
का
है
जाँ
ख़त्म
होती
है
यहाँ
सारी
दास्ताँ
इश्क़
में
मिलना
मुक़द्दर
है
वर्ना
तो
मिट
गए
हैं
इश्क़
के
कितने
ही
निशाँ
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Shams Amiruddin
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इश्क़
का
मैं
पयाम
हो
जाऊँ
यानी
तेरा
ग़ुलाम
हो
जाऊँ
चाहती
हो
कि
इस
मुहब्बत
में
अब
मैं
भी
बे-लगाम
हो
जाऊँ
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Shams Amiruddin
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हर
रंग
देखे
मैंने
उस
गुल-ख़ार
के
जितने
चुराए
रंग
लब
से
यार
के
Shams Amiruddin
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किरदार
देखे
हमने
बा-किरदार
के
वो
शख़्स
कल
पीछे
दिखा
दीवार
के
ख़ुद
को
बताते
हैं
जो
बा-किरदार
से
बद-कारी
देखी
उनके
भी
किरदार
के
इंसाँ
के
रग
से
खूँ
बहाए
जिस
ने
कल
डर
तक
न
थी
चेहरे
पे
उस
ख़ूँ-ख़ार
के
मुस्कान
छीनी
उसने
ही
लब
से
मिरे
नग़्में
सुनाता
था
मैं
जिन
को
प्यार
के
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Shams Amiruddin
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यूँँ
मोहब्बत
की
क़सम
खा
बिछड़े
वहाँ
इक
अलग
दुनिया
बसाई
हम
ने
जहाँ
मुझ
से
डरती
है
मेरी
परछाई
भी
अब
सो
है
मेरे
साथ
बस
तन्हाई
यहाँ
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Shams Amiruddin
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