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Shams Amiruddin
ishq ka main payaam ho jaaun
ishq ka main payaam ho jaaun | इश्क़ का मैं पयाम हो जाऊँ
- Shams Amiruddin
इश्क़
का
मैं
पयाम
हो
जाऊँ
यानी
तेरा
ग़ुलाम
हो
जाऊँ
चाहती
हो
कि
इस
मुहब्बत
में
अब
मैं
भी
बे-लगाम
हो
जाऊँ
- Shams Amiruddin
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जी
नहीं
भरता
कभी
इक
बार
में
इश्क़
हम
ने
भी
दोबारा
कर
लिया
shaan manral
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अपने
इश्क़
का
यूँँ
इज़हार
करना
है
तुझ
सेे
तुझको
हाथों
से
पहनाएँगें
कानों
में
झुमके
Harsh saxena
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क्या
ग़लत-फ़हमी
में
रह
जाने
का
सदमा
कुछ
नहीं
वो
मुझे
समझा
तो
सकता
था
कि
ऐसा
कुछ
नहीं
इश्क़
से
बच
कर
भी
बंदा
कुछ
नहीं
होता
मगर
ये
भी
सच
है
इश्क़
में
बंदे
का
बचता
कुछ
नहीं
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Tehzeeb Hafi
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इश्क़
में
जी
को
सब्र
ओ
ताब
कहाँ
उस
से
आँखें
लड़ीं
तो
ख़्वाब
कहाँ
Meer Taqi Meer
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इस
मरज़
से
कोई
बचा
भी
है
चारा-गर
इश्क़
की
दवा
भी
है
Unknown
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ये
इश्क़
नहीं
आसाँ
इतना
ही
समझ
लीजे
इक
आग
का
दरिया
है
और
डूब
के
जाना
है
Jigar Moradabadi
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अगर
तुम
हो
तो
घबराने
की
कोई
बात
थोड़ी
है
ज़रा
सी
बूँदा-बाँदी
है
बहुत
बरसात
थोड़ी
है
ये
राह-ए-इश्क़
है
इस
में
क़दम
ऐसे
ही
उठते
हैं
मोहब्बत
सोचने
वालों
के
बस
की
बात
थोड़ी
है
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Abrar Kashif
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क्या
कहूँ
तुम
से
मैं
कि
क्या
है
इश्क़
जान
का
रोग
है
बला
है
इश्क़
Meer Taqi Meer
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इश्क़
को
छोड़
सब
चुन
लिया
उसने
फिर
रख
दिया
फल
को
फिर
टोकरी
से
अलग
Neeraj Neer
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ये
इश्क़
आग
है
और
वो
बदन
शरारा
है
ये
सर्द
बर्फ़
सा
लड़का
पिघलने
वाला
है
Shadab Asghar
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खेल
सारा
ही
फ़क़त
क़िस्मत
का
है
जाँ
ख़त्म
होती
है
यहाँ
सारी
दास्ताँ
इश्क़
में
मिलना
मुक़द्दर
है
वर्ना
तो
मिट
गए
हैं
इश्क़
के
कितने
ही
निशाँ
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Shams Amiruddin
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हर
रंग
देखे
मैंने
उस
गुल-ख़ार
के
जितने
चुराए
रंग
लब
से
यार
के
Shams Amiruddin
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मोहब्बत
जो
समझते
हैं
वहीं
हम
को
समझते
हैं
फ़क़त
अब
हम
हक़ीकत
भी
यूँँ
ख़्वाबों
को
समझते
हैं
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Shams Amiruddin
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चाहूँ
मैं
तो
भी
नहीं
टलती
बला
इक
इस
तरह
से
मुझ
में
है
उलझी
बला
इक
चाहती
है
जब
मसल
देती
है
मुझ
को
मेरे
अंदर
सदियों
से
पलती
बला
इक
शाम
ढ़लते
ही
निकल
आता
हूँ
पीने
यूँँ
है
मुझ
में
फूलती-फलती
बला
इक
चलते-चलते
लड़खड़ा
जाता
हूँ
अक्सर
जब
मचलती
है
मिरी
प्यासी
बला
इक
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Shams Amiruddin
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आँखों
में
उनकी
मैंने
देखा
है
ज़ेहन
में
कोई
और
समाया
है
कैसे
नाराज़गी
जताएँ
हम
उसने
अपना
बना
के
छोड़ा
है
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Shams Amiruddin
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